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राष्ट्रीय शिक्षा नीति : सिर्फ कागज नहीं हमारी मेहनत से जमीनी हकीकत बनेगी नई शिक्षा नीति…21वीं सदी के नए भारत की नींव रखेगी, NEP पर PM की 10 खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में नई शिक्षा नीति -2020 पर अपनी बात रखी. इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश निशंक पोखरियाल, नई शिक्षा नीति कमेटी के अध्यक्ष कस्तूरीरंगन समेत अन्य लोग मौजूद रहे, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि जमीनी हकीकत भी बनेगी और इसके लिए हम सभी को मेहनत करनी होगी, पीएम ने कहा कि यह नीति सिर्फ सर्कुलर या नोटिफिकेशन से ही नहीं काम करने लगेगी बल्कि इसके लिए हम सभी को रणनीति बनानी होगी और इसे लागू करने के लिए रोडमैप तैयार करना होगा |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनईपी पर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के नए भारत की नींव रखेगी. अभी तक हमारी शिक्षा व्यवस्था में क्या सोचना है पर ध्यान केंद्रित रहा, जबकि नई शिक्षा नीति में कैसे सोचना है पर बल दिया जा रहा है.

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ सर्कुलर जारी करके, नोटिफाई करके लागू नहीं होगी. इसके लिए मन बनाना होगा, आप सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी. भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए आपके लिए ये कार्य एक महायज्ञ की तरह है.

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी- राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अमल में लाने के लिए हम सभी को एकसाथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है. यहां से विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, स्कूल एजुकेशन बोर्ड्स, अलग-अलग राज्यों, अलग-अलग जिम्मेदार लोगों के साथ संवाद और समन्वय का नया दौर शुरू होने वाला है.

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हायर एजुकेशन को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट, क्रेडिंट बैंक के पीछे यही सोच है. हम उस समय की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा. इसके लिए उसे निरंतर खुद को री-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा

भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था. स्कूल करिकलम के 10+2 फॉर्मेट से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 करिकलम का स्ट्रक्चर देना, बड़ा कदम है.

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कुछ लोगों के मन में ये सवाल आना स्वाभाविक है कि इतना बड़ा बदलाव कागजों पर तो कर दिया गया, लेकिन इसे जमीन पर कैसे उतारा जाएगा. यानी अब सबकी निगाहें इसके लागू किये जाने की तरफ हैं. आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने से सीधे तौर पर जुड़े हैं और इसलिए आपकी भूमिका बहुत ज्यादा अहम है. जहां तक राजनीतिक इच्छाशक्ति की बात है, मैं पूरी तरह कमिटेड हूं, मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं

ये भी खुशी की बात है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का एकपक्ष है, या किसी एक ओर झुकी हुई है

आज मुझे संतोष है कि भारत की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी- राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया. बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है. एक नया वैश्विक मानक भी तय हो रहा है

इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है. ये एक बहुत बड़ी वजह है जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, 5वीं क्लास तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है.

आज देशभर में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है. अलग-अलग क्षेत्र के लोग, अलग-अलग विचारधाराओं के लोग, अपनी राय दे रहे हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा कर रहे हैं. ये एक स्वस्थ बहस है, ये जितनी ज्यादा होगी, उतना ही लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा

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