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CM भूपेश ने कलेक्टर-SP कांफ्रेंस में दिखाए सख्त तेवर, कहा – गोठान जमीन चयन में विवाद से बचे….कमिश्नर हर दिन दफ्तर निरीक्षण में जाएं….इन 16 बिंदुओं में हो रही कॉन्फ्रेंस



मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंत्रालय में कलेक्टर-एसपी कान्फ्रेंस शुरू हो गयी है, बैठक में मुख्य सचिव सुनील कुजूर, अपर मुख्य सचिव सर्व के.डी.पी. राव, अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद।

कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र में राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य के सभी संभागों के कमिश्नर, जिला कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और नगर निगमों के आयुक्त भी उपस्थित। मुख्य 16 बिंदुओं सहित करीब 2 दर्जन बिन्दुओ की समीक्षा की।

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मुख्यमंत्री ने कांफ्रेंस में सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कलेक्टर राजस्व मामलों के निराकरण में तेजी लाएं, जमीनों के बंदोबस्त त्रुटियों के निराकरण के लिए अफसर नियमित कैंप लगाये जाये, ताकि लोगों को परेशानी से दो चार ना होना पड़े |

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि गोठान के लिए भूमि चयन में पूरी सावधानी बरतें। इस विषय में विवाद से बचें,कानून व्यवस्था की समस्या ना आए। गढ्ढा न हो ,छाया रहे, इसेक साथ ही उन्होंने कहा कि गोठान निर्माण धार्मिक नहीं आर्थिक कार्य है, जहां गौठान बन गये हैं वहां पशुओं का आना शुरू हो गया है। नरवा, गरुआ, घुरवा, बाड़ी योजना से एक-दो साल में अच्छे परिणाम आएंगे । वही वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त सभी लंबित और खारिज प्रकरणों की समीक्षा करने कि बात कही |

सीएम भूपेश ने निर्देश दिया कि संभागायुक्त हर दिन कम से कम एक कार्यालय का निरीक्षण करें। कलेक्टर, एसडीएम और तहसील कार्यालयों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित हो, वही लोक सेवा में वास्तविक निराकरण हो , आवेदक संतुष्ट होना चाहिए, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आवेदनों का गुणवत्ता पूर्ण निराकरण करने पर जोर दे |

वही सौर सुजला योजना के 20 फीसदी कनेक्शन गौठानों के लिए सुरक्षित राखी जाने कि बात कही,  मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 1866 गोठानों का चिन्हांकन किया गया है  इसमें से 260 स्थानों में कार्य प्रारम्भ किया गया है।

सीएम ने कहा कि गोठान में सीमेंट कांक्रीट का उपयोग ना हो।ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ाएं।पैरादान ,चारादान को प्रोत्साहित करें। गौठान में एकत्र होने वाले गोबर के उपयोग के लिए बायोगैस संयंत्रों के निर्माण में तेजी लाएं।

वही गोठान के लिए भूमि चयन में पूरी सावधानी बरतें। इस विषय में विवाद से बचें,कानून व्यवस्था की समस्या ना आए। गढ्ढा न हो ,छाया रहे।

 

 

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