CG-मॉल में पार्किंग फीस वसूली पर आयोग का बड़ा फैसला, ग्राहक से पैसे लेना पड़ा भारी…मॉल में आने वालों से पार्किंग शुल्क नहीं ले सकते-आयोग
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रायपुर। मॉल में खरीदारी या घूमने आने वाले ग्राहकों से पार्किंग शुल्क वसूलना प्रबंधन को भारी पड़ गया। सड्डू स्थित एक मॉल में पार्किंग फीस वसूली के मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने मॉल प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को बरकरार रखा है। आयोग ने पार्किंग शुल्क की वसूली को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना है।
मामले में आयोग ने मॉल प्रबंधन को शिकायतकर्ता ग्राहक को 50 हजार रुपये मानसिक परेशानी और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। कुल 55 हजार रुपये की राशि 45 दिन के भीतर चुकानी होगी। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर फैसले की तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
जिला फोरम के आदेश को चुनौती दी थी
मामला सड्डू स्थित मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने मॉल में वाहन पार्क करने के एवज में शुल्क लिए जाने को लेकर उपभोक्ता फोरम में शिकायत की थी। जिला उपभोक्ता फोरम ने मामले की सुनवाई के बाद मॉल प्रबंधन को ग्राहकों से पार्किंग शुल्क नहीं लेने और फ्री पार्किंग की सुविधा देने का आदेश दिया था।
मॉल प्रबंधन ने जिला फोरम के इस फैसले को राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी थी। अब राज्य आयोग ने अपील खारिज करते हुए जिला फोरम के आदेश को कायम रखा है।
दुकानदारों से मेंटेनेंस शुल्क, फिर ग्राहकों से पार्किंग फीस क्यों?
आयोग ने अपने फैसले में पार्किंग शुल्क की वसूली को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। आयोग के अनुसार, मॉल प्रबंधन पहले से ही दुकानदारों से एसी, बिजली/लाइट, सुरक्षा और एस्केलेटर के रखरखाव सहित विभिन्न सुविधाओं के लिए शुल्क लेता है। ऐसे में ग्राहकों से अलग से पार्किंग शुल्क वसूलने को आयोग ने उचित नहीं माना।
आयोग ने यह भी माना कि ग्राहकों को पार्किंग व्यवस्था और उससे जुड़े शुल्क के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई थी।
बिना बताए FASTag से रकम कटने पर भी सवाल
मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि वाहन से पार्किंग शुल्क की राशि FASTag के माध्यम से स्वतः काटी गई। आयोग ने इस तरीके पर भी आपत्ति जताई। इसके अलावा पार्किंग स्थल पर ग्राहकों को 10 मिनट की निःशुल्क पार्किंग या वाहन छोड़ने की सुविधा के संबंध में स्पष्ट सूचना देने वाला बोर्ड भी नहीं लगा था।
आयोग ने इन परिस्थितियों को उपभोक्ता के हितों और पारदर्शी सेवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना।
24 सितंबर को आया फैसला
यह फैसला 24 सितंबर 2026 को राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने सुनाया। आयोग ने जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए मॉल प्रबंधन की अपील खारिज कर दी।
फैसले के मुताबिक, शिकायतकर्ता को 45 दिन के भीतर 55 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। देरी होने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
