बिलासपुर का करोड़ों का सर्पदंश मुआवजा घोटाला: सिम्स की पूर्व डॉक्टर और रीडर समेत 12 गिरफ्तार; आठवीं पास ड्राइवर निकला मास्टरमाइंड
तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों का सिंडिकेट बेनकाब, फर्जी दस्तावेज और सरकारी सील-मोहर जब्त; मास्टरमाइंड निकला तहसीलदार का ड्राइवर
बिलासपुर, 20 जुलाई 2026। बिलासपुर पुलिस ने करोड़ों रुपये के चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पहले चरण में 68 लाख रुपये की गड़बड़ी का खुलासा किया है। मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में सिम्स की पूर्व डॉक्टर डॉ. प्रियंका सोनी, एसडीएम कार्यालय के रीडर नरेंद्र कौशिक, तहसीलदार कार्यालय के रीडर हरीश राठौड़ तथा तहसीलदार का दैनिक वेतनभोगी चालक गोविंद विश्वकर्मा शामिल हैं। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई अभी शुरुआती चरण में है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।
फर्जी सर्पदंश दिखाकर लिया जाता था मुआवजा
जांच में सामने आया है कि सिम्स के डॉक्टरों, तहसील और एसडीएम कार्यालय के कुछ कर्मचारियों का एक संगठित गिरोह फर्जी सर्पदंश मामलों के जरिए सरकारी मुआवजा दिलाने का खेल चला रहा था। पुलिस के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड गोविंद विश्वकर्मा है, जो तहसीलदार के वाहन चालक के रूप में कार्यरत था।
आरोप है कि गोविंद विश्वकर्मा किसी भी संदिग्ध मौत की जानकारी मिलने पर वकील हीरा प्रसाद खांडेकर से संपर्क करता था। इसके बाद हार्ट अटैक, करंट लगने या अन्य कारणों से हुई मौत को सर्पदंश का मामला दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। इसमें कथित रूप से चिकित्सा प्रमाणपत्र, राजस्व अभिलेख और अन्य दस्तावेज तैयार कर संबंधित अधिकारियों से हस्ताक्षर कराए जाते थे, जिसके आधार पर मुआवजा राशि स्वीकृत कराई जाती थी।
रेड में मिले फर्जी दस्तावेज और सरकारी सील
पुलिस ने पिछले 15 दिनों में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, रिकॉर्ड और एसडीएम व तहसीलदार कार्यालय की सील-मोहर जब्त की है। इन साक्ष्यों के आधार पर पूरे सिंडिकेट की भूमिका की जांच की जा रही है।
2019 से 2023 के बीच हुआ सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा
पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में वर्ष 2019 से 2023 के बीच सबसे अधिक अनियमितताएं सामने आई हैं। इसी आधार पर सबसे पहले बिल्हा थाने में डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था, जिसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया।
एसएसपी ने बताया कि मामले में अभी 10 से 12 और लोगों की गिरफ्तारी होनी बाकी है। सरकंडा, तखतपुर और तोरवा थाना पुलिस को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद घोटाले से जुड़े सभी दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

