बिलासपुर केंद्रीय जेल में कैदी की संदिग्ध मौत: एक महीने में चौथी घटना से मचा हड़कंप, व्यवस्था पर उठे रहे गंभीर सवाल

बिलासपुर: बिलासपुर केंद्रीय जेल में कैदियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जेल के भीतर एक बार फिर एक विचाराधीन/सजायाफ्ता कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद कैदी की तबीयत अचानक बिगड़ी थी, जिसे इलाज के लिए सिम्स (SIMS) अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि पिछले एक महीने के भीतर केंद्रीय जेल में कैदी की मौत की यह चौथी घटना है, जिससे प्रशासनिक अमले और जेल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पॉक्सो एक्ट में काट रहा था 20 साल की सजा
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 31 वर्षीय प्रभु कुमार मनहर के रूप में हुई है। वह वर्ष 2024 से पॉक्सो (POCSO) एक्ट के एक मामले में 20 साल की सजा काट रहा था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ दिनों से सीने में दर्द की समस्या से जूझ रहा था और जेल के अस्पताल में ही उसका उपचार चल रहा था।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गई सांसें
सोमवार को अचानक प्रभु कुमार की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन हरकत में आया और उसे तत्काल सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि, जब तक उसे अस्पताल पहुंचाया जाता और डॉक्टर इलाज शुरू करते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
एक महीने में चार मौतें, जेल प्रशासन पर उठ रहे सवाल
महज एक महीने के भीतर केंद्रीय जेल के अंदर चार कैदियों की मौत हो जाना अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े करता है, क्या जेल के भीतर मौजूद अस्पताल और चिकित्सा सुविधाएं गंभीर मरीजों के लिए नाकाफी साबित हो रही हैं? क्या कैदियों की गंभीर शिकायतों को शुरुआती दौर में नजरअंदाज किया जा रहा है?कैदियों की सेहत और सुरक्षा को लेकर जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली अब संदेह के घेरे में है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज
फिलहाल मौत के असली कारणों का अधिकारिक खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। इस घटना के बाद से जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है और प्रशासनिक गलियारों में भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है कि आखिर जेल के भीतर लगातार इस तरह की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं।
