अब कागजों में नहीं, क्लिक पर मिलेंगे जमीन के रिकॉर्ड! छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में डिजिटल होगा राजस्व रिकॉर्ड, AI-OCR से होगी खोज

रायपुर | 17 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ में राजस्व संबंधी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में वसुंधरा परियोजना के तहत बड़े स्तर पर काम शुरू किया गया है। इसके तहत जिला और तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण किया जाएगा और पुराने राजस्व अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा।
इसी सिलसिले में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजस्व अभिलेखों के व्यवस्थित संधारण, डिजिटलीकरण और नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई।
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में चयनित जिलों के राजस्व अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके बाद इस व्यवस्था का विस्तार छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों तक किया जाएगा।
बैठक में नामांतरण समेत अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में स्पष्टता और एकरूपता लाने तथा पुराने अभिलेखों को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित करने पर जोर दिया गया।
कौन-कौन से रिकॉर्ड होंगे डिजिटल?
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी के अनुसार, परियोजना के तहत महत्वपूर्ण पुराने दस्तावेजों की स्कैनिंग और डाटा एंट्री की जाएगी।
इनमें प्रमुख रूप से—
- अधिकार अभिलेख पंजी
- बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल
- निस्तार पत्रक
- खसरा
- राजस्व न्यायालय के आदेश
- मूल ग्राम नक्शे
- संशोधन पंजी
- वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख
- किश्तबंदी खतौनी
जैसे दस्तावेज शामिल हैं।
सेवा सेतु से जुड़ेगा डिजिटल रिकॉर्ड
परियोजना के तहत तैयार होने वाले डिजिटल रिकॉर्ड भंडार को सेवा सेतु पोर्टल से जोड़े जाने की योजना है। इसके बाद नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नागरिक ऑनलाइन आवेदन करने, शुल्क जमा करने, प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त करने और आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक करने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
AI और OCR से पुराने दस्तावेजों की खोज होगी आसान
वसुंधरा परियोजना में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। रिकॉर्ड रूम में रखे भौतिक दस्तावेजों को बारकोड आधारित वर्गीकरण और डिजिटल लोकेशन सिस्टम के जरिए व्यवस्थित करने की योजना है।
वहीं पुराने और हस्तलिखित दस्तावेजों में जानकारी तलाशने के लिए OCR (Optical Character Recognition) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ AI आधारित सर्च सुविधा विकसित करने की भी योजना है।
इससे वर्षों पुराने राजस्व रिकॉर्ड में किसी विशेष जानकारी को डिजिटल माध्यम से खोजने की प्रक्रिया आसान हो सकेगी और अभिलेखों के संरक्षण के साथ नागरिक सेवाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।
