रवि उप्पल की गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ में बढ़ी हलचल! महादेव सट्टे के किन नेताओं-अफसरों तक पहुंचेगी ED की जांच? दुबई पहुंची CBI की टीम
Mahadev Satta App Case: सौरभ चंद्राकर के बाद अब रवि उप्पल की गिरफ्तारी से महादेव सट्टा ऐप मामले में जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद। ED के मुताबिक, करोड़ों के हवाला लेनदेन और छत्तीसगढ़ के नेताओं-नौकरशाहों तक कथित रकम पहुंचाने में उप्पल की अहम भूमिका थी।

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में भिलाई निवासी रवि उप्पल की दुबई में गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। इसकी वजह सिर्फ रवि उप्पल का पकड़ा जाना नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे सिंडिकेट में उसकी कथित भूमिका है। ED की जांच में उप्पल को ऐसा महत्वपूर्ण चेहरा बताया गया है, जो सट्टे से होने वाली अवैध कमाई के वित्तीय प्रबंधन से लेकर छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर नेताओं और नौकरशाहों तक संपर्क बनाए रखने का काम करता था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रवि उप्पल से पूछताछ में किन लोगों के नाम सामने आते हैं? करोड़ों रुपये के कथित हवाला लेनदेन की कड़ियां किन प्रभावशाली चेहरों तक पहुंचती हैं? और क्या महादेव सट्टा सिंडिकेट को संरक्षण देने वाले कथित नेटवर्क का पूरा खुलासा हो पाएगा?
ED के मुताबिक, हवाला नेटवर्क की अहम जिम्मेदारी थी उप्पल के पास
प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक का संचालन दुबई से किया जा रहा था। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल इस नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटर थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि जहां सौरभ चंद्राकर प्लेटफॉर्म के प्रचार और संचालन से जुड़ा था, वहीं रवि उप्पल वित्तीय नेटवर्क, हवाला के जरिए रकम पहुंचाने और सट्टा संचालकों के साथ संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालता था।
4 नवंबर की एक रिपोर्ट में एक ED अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि उप्पल ने सैकड़ों करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन को संभाला और छत्तीसगढ़ के नेताओं तथा नौकरशाहों के साथ संपर्क बनाए रखने में उसकी प्रमुख भूमिका थी। एजेंसी का मानना है कि उससे पूछताछ अवैध कमाई के लाभार्थियों और पूरे मनी ट्रेल की पहचान में महत्वपूर्ण हो सकती है।
चार्जशीट में नेताओं और अफसरों तक रकम पहुंचाने का आरोप
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू ED की चार्जशीट में सामने आया है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि रवि उप्पल छत्तीसगढ़ के नौकरशाहों और नेताओं तक कथित रिश्वत या प्रोटेक्शन मनी पहुंचाने की व्यवस्था में शामिल था।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में दाखिल चार्जशीट में ED ने आरोप लगाया था कि उप्पल छत्तीसगढ़ के अधिकारियों और नेताओं तक रकम पहुंचाने का काम चंद्रभूषण वर्मा नामक पुलिस सहायक उप निरीक्षक और अन्य लोगों के माध्यम से करवा रहा था। यह आरोप जांच एजेंसी के दस्तावेजों पर आधारित है।
यही वजह है कि रवि उप्पल की गिरफ्तारी को इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है। यदि भारतीय एजेंसियां उसे अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ कर पाती हैं, तो कथित भुगतान व्यवस्था, हवाला नेटवर्क और उसके लाभार्थियों से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
सौरभ के बाद उप्पल से पूछताछ, खुल सकते हैं कई राज
महादेव सट्टा ऐप के दूसरे प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर को ओमान से भारत लाया गया था। रायपुर की विशेष अदालत ने उसे आठ दिन की CBI हिरासत में भेजा है। अब रवि उप्पल की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने दोनों प्रमुख आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का अवसर है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सट्टे से अर्जित रकम किन बैंक खातों और हवाला चैनलों से होकर गुजरी, भारत में किस स्तर पर उसका वितरण हुआ और इस कथित अवैध कारोबार को चलाने के लिए किन लोगों की मदद ली गई।
ED की जांच में महादेव नेटवर्क और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म का अनुमानित कारोबार करीब 88 हजार करोड़ से 94 हजार करोड़ रुपये तक बताया गया है। एजेंसी के मुताबिक, इसमें से 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये प्रमोटरों तक पहुंचाए गए।
छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में क्यों बढ़ी बेचैनी?
महादेव सट्टा ऐप मामला पहले से ही छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा मुद्दा रहा है। इस मामले में नेताओं, पुलिस अधिकारियों और नौकरशाहों के कथित संरक्षण और लेनदेन को लेकर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच भी इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
अब रवि उप्पल की गिरफ्तारी के बाद जांच का केंद्र केवल सट्टा कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। एजेंसियों के सामने कथित आर्थिक लेनदेन के लाभार्थियों, संपर्क सूत्रों और संरक्षण देने वाले नेटवर्क की पहचान करने की चुनौती होगी।
