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Big News; सौरभ चंद्राकर के बाद अब ‘हवाला किंग’ रवि उप्पल दुबई में गिरफ्तार! सैकड़ों करोड़ के हवाला लेनदेन में अहम कड़ी….CG के नेताओं-अफसरों की बढ़ेगी धड़कनें


रायपुर@CGNews24.com/ छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप मामले में जांच एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी मिलने की खबर है। सट्टा सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने के बाद अब उसके कारोबारी साझेदार और नेटवर्क के दूसरे प्रमुख आरोपी रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। भिलाई निवासी रवि उप्पल की गिरफ्तारी की खबर ऐसे समय आई है, जब रायपुर की विशेष अदालत ने बुधवार को सौरभ चंद्राकर को आठ दिन की CBI हिरासत में भेज दिया है।

इस घटनाक्रम से महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियों के लिए अब सबसे अहम सवाल यह है कि इस कथित अवैध कारोबार का पैसा किन रास्तों से भारत से बाहर पहुंचा, हवाला के जरिए किस-किस तक रकम पहुंचाई गई और इस पूरे नेटवर्क को कथित रूप से संरक्षण देने वाले लोग कौन थे।

हालांकि, रवि उप्पल की गिरफ्तारी को लेकर अभी एक महत्वपूर्ण पेंच है। भारतीय एजेंसियों को यह जानकारी अनौपचारिक माध्यमों से मिली है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से भारत को अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। भारतीय अधिकारी औपचारिक माध्यमों से जानकारी जुटाने और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में लगे हैं।

सौरभ के बाद अब रवि उप्पल पर शिकंजा

महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को CBI की टीम ओमान से भारत लेकर आई है। एक नवंबर को उसका प्रत्यर्पण हुआ और चार नवंबर को रायपुर की विशेष CBI अदालत ने उसे आठ दिन की हिरासत में भेजने का आदेश दिया। CBI ने पूछताछ के लिए दस दिन की हिरासत मांगी थी। अदालत ने एजेंसी को उसे पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाने की अनुमति भी दी है।

इसी घटनाक्रम के बीच रवि उप्पल की दुबई में गिरफ्तारी की खबर सामने आई। हिंदुस्तान टाइम्स की चार नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने गिरफ्तारी की जानकारी मिलने की पुष्टि की है, लेकिन यह सूचना अभी अनौपचारिक माध्यमों से मिली है। एजेंसियां UAE से औपचारिक जानकारी हासिल करने और उसे भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया तेज करने की कोशिश कर रही हैं।

यदि गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो महादेव नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और विदेश में सक्रिय उसके सहयोगियों को लेकर जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

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भिलाई से दुबई तक फैला था कथित सट्टा कारोबार

रवि उप्पल छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने मिलकर महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया था। इसका संचालन विदेश से किया जाता था और देश के अलग-अलग हिस्सों में पैनल तथा शाखाओं के माध्यम से सट्टा गतिविधियां संचालित होने के आरोप हैं।

CBI की जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम और दूसरे आयोजनों पर ऑनलाइन दांव लगाए जाते थे। कथित तौर पर बड़ी संख्या में बैंक खातों का इस्तेमाल रकम के लेनदेन के लिए किया गया। इन खातों के जरिए पैसा कई स्तरों पर घुमाकर UAE तक पहुंचाया जाता था।

CBI ने इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर जांच अपने हाथ में ली थी। एजेंसी ने 18 दिसंबर 2024 को FIR दर्ज कर राज्य के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जांच को आगे बढ़ाया।

सैकड़ों करोड़ के हवाला लेनदेन की अहम कड़ी बताया गया उप्पल

रवि उप्पल की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में उसे नेटवर्क के वित्तीय संचालन की अहम कड़ी बताया गया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में ED के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि उप्पल कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन को संभालता था। रिपोर्ट के मुताबिक, वह नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और सट्टा संचालकों के साथ संपर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

ED की जांच में यह भी आरोप सामने आए हैं कि महादेव नेटवर्क से जुड़े अवैध लाभ का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाया गया। एजेंसी ने छत्तीसगढ़ में कुछ पुलिस अधिकारियों, नेताओं और नौकरशाहों की कथित भूमिका की भी जांच की है।

यहां यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि किसी व्यक्ति या अधिकारी का नाम जांच में आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। कथित लेनदेन और संरक्षण से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी।

वानुअतु पासपोर्ट लेकर भारत से बाहर रहने का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, भारत से बाहर रहने के दौरान सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश वानुअतु के पासपोर्ट हासिल किए थे। एजेंसियों को आशंका थी कि विदेशी पासपोर्ट के जरिए वे अपनी पहचान और अंतरराष्ट्रीय आवाजाही का इस्तेमाल कर भारतीय जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे।

रवि उप्पल के खिलाफ अक्टूबर 2023 में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद दिसंबर 2023 में दुबई में उसे हिरासत में लिया गया था, लेकिन करीब 45 दिन बाद वह रिहा हो गया। ED ने जनवरी 2024 में UAE को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उप्पल UAE से निकलकर वानुअतु चला गया था और हाल ही में दोबारा UAE लौटा था। अब दुबई में उसकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।

छत्तीसगढ़ के नेताओं और नौकरशाहों से कथित संपर्क की जांच

महादेव एप मामले का छत्तीसगढ़ कनेक्शन शुरुआत से ही जांच के केंद्र में रहा है। ED ने आरोप लगाया है कि नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर चलाने के लिए कुछ प्रभावशाली लोगों का कथित सहयोग और संरक्षण हासिल किया गया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, रवि उप्पल की भूमिका केवल सट्टा कारोबार तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह वित्तीय नेटवर्क और कथित हवाला लेनदेन से भी जुड़ा हुआ था। ऐसे में उससे पूछताछ होने पर एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि विदेशों से संचालित इस नेटवर्क में भारत के भीतर कौन-कौन लोग संपर्क में थे और कथित अवैध कमाई का इस्तेमाल कहां किया गया।

हालांकि, किसी भी राजनीतिक व्यक्ति, पुलिस अधिकारी या नौकरशाह की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों के आधिकारिक दस्तावेजों और अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।

94 हजार करोड़ रुपये तक के लेनदेन का ED ने किया आकलन

महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े कुछ प्लेटफॉर्म के कथित कारोबार को लेकर ED ने लगभग 94 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन का आकलन किया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से यह आंकड़ा दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से लगभग 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये प्रमोटरों तक पहुंचाए जाने का एजेंसी का अनुमान है।

दूसरी ओर, CBI से जुड़े मामले की रिपोर्टिंग में इस कथित सिंडिकेट को करीब 6,000 करोड़ रुपये के घोटाले के रूप में भी उल्लेखित किया गया है। ये अलग-अलग जांच और आकलन के आंकड़े हैं।

cgnews24 Team

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