राज्योत्सव में पत्रकार से पुलिस की मारपीट! वीडियो वायरल, आरक्षक सस्पेंड; थाने के सामने पत्रकारों का धरना, Video

राजा फतेह सिंह मैदान में समाचार संकलन के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकार के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि कहासुनी के बाद पुलिसकर्मियों ने किशोर सोनी के साथ मारपीट की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पत्रकारों में आक्रोश फैल गया। मामला इतना बढ़ा कि जिले के पत्रकार थाने के सामने धरने पर बैठ गए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करने लगे।
मामले में शुरुआती कार्रवाई करते हुए 8वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, राजनांदगांव ने आरक्षक रजनीकांत उपाध्याय को निलंबित कर दिया है।
राज्योत्सव की कवरेज के दौरान आखिर क्या हुआ?
जानकारी के मुताबिक, राज्योत्सव कार्यक्रम के दौरान राजा फतेह सिंह मैदान में पत्रकार किशोर सोनी कवरेज कर रहे थे। इसी दौरान उनकी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से कहासुनी हो गई।
विवाद ने कथित तौर पर हाथापाई का रूप ले लिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला सार्वजनिक हुआ। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
पत्रकारों का सवाल है कि यदि कवरेज के दौरान किसी तरह की आपत्ति थी तो पुलिसकर्मी नियमानुसार कार्रवाई कर सकते थे। लेकिन पत्रकार के साथ कथित मारपीट ने पुलिस के व्यवहार और मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आदेश जारी होते ही आरक्षक निलंबित
मामले में 2 नवंबर 2026 को 8वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, राजनांदगांव की ओर से निलंबन आदेश जारी किया गया। आदेश के मुताबिक, आरक्षक क्रमांक 319 रजनीकांत उपाध्याय पर पत्रकार किशोर कुमार सोनी के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट करने के आरोप हैं। कार्रवाई पुलिस अधीक्षक, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के पत्र के आधार पर की गई है।
निलंबन आदेश 2 नवंबर से प्रभावी किया गया है। निलंबन अवधि में आरक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। उन्हें वाहिनी मुख्यालय राजनांदगांव में संबद्ध किया गया है
थाने के सामने पत्रकारों का धरना, सभी दोषियों पर कार्रवाई की मांग
आरक्षक के निलंबन के बावजूद पत्रकारों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। जिला पत्रकार संघ के सदस्यों सहित कई पत्रकार थाने के सामने धरने पर बैठ गए।
पत्रकारों की प्रमुख मांगें हैं:
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पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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मारपीट में शामिल सभी पुलिसकर्मियों की भूमिका तय हो।
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दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों पर वैधानिक कार्रवाई हो।
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पीड़ित पत्रकार किशोर सोनी को सुरक्षा प्रदान की जाए।
पत्रकारों का कहना है कि समाचार संकलन और कवरेज के दौरान किसी तरह का विवाद होने पर उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। पुलिस की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखने की है, न कि पत्रकारों के साथ बल प्रयोग करने की।
एक आरक्षक के निलंबन से आगे भी उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मारपीट की घटना में केवल एक आरक्षक शामिल था या अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी थी? वायरल वीडियो, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच से ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट होगी।
आरक्षक के निलंबन को शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई माना जा सकता है, लेकिन पत्रकार संगठनों की मांग है कि जांच केवल निलंबन तक सीमित न रहे और सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
राज्योत्सव के मंच से छत्तीसगढ़ अपनी उपलब्धियों और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश दे रहा है। ऐसे में उसी आयोजन की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला प्रशासन के लिए भी गंभीर सवाल छोड़ गया है।
