भिलाई के जूस कॉर्नर से महादेव ऐप के कथित सट्टा नेटवर्क तक…सौरभ चंद्राकर से अब CBI करेगी पूछताछ, रायपुर कोर्ट से मिली दो दिन की रिमांड

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। इस नेटवर्क के प्रमुख आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया। अदालत से जांच एजेंसी को दो दिन की रिमांड मिली है। अब CBI उससे पूछताछ कर कथित सट्टा नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और विदेशों में फैले संपर्कों से जुड़ी कड़ियों की पड़ताल करेगी।
सौरभ चंद्राकर की कहानी इसलिए भी चर्चा में रही है, क्योंकि उसका शुरुआती नाता छत्तीसगढ़ के भिलाई से बताया जाता है। कभी जूस कॉर्नर चलाने वाले चंद्राकर का नाम बाद में देश-विदेश में फैले कथित ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जुड़ा। जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
भिलाई से शुरू हुआ सफर, ऑनलाइन सट्टे की दुनिया में कैसे पहुंचा?
सौरभ चंद्राकर का छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई क्षेत्र से पुराना संबंध रहा है। मीडिया रिपोर्टों में उसके शुरुआती कारोबार के रूप में जूस की दुकान का जिक्र किया गया है। बताया जाता है कि सट्टेबाजी से उसका जुड़ाव पहले स्थानीय स्तर पर था। कोरोना काल में जब पारंपरिक सट्टे का कारोबार प्रभावित हुआ, तब ऑनलाइन सट्टेबाजी की ओर उसका रुझान बढ़ा।
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, चंद्राकर ने हैदराबाद में ऑनलाइन सट्टेबाजी के तौर-तरीकों को समझा। इसके बाद उसने कथित तौर पर अपने सहयोगियों के साथ महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क खड़ा किया। हालांकि, उसके शुरुआती कारोबार और नेटवर्क बनाने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच एजेंसियों के दस्तावेजों से मिलान जरूरी है।
दुबई बना ठिकाना, देशभर में फैले कथित पैनल और ब्रांच
जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक का संचालन विदेश से किया जा रहा था। भारत के अलग-अलग हिस्सों में फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और ब्रांच बनाए गए थे। इनके जरिए यूजर जोड़े जाते थे और क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम सहित विभिन्न आयोजनों पर दांव लगवाए जाते थे।
CBI की जांच में आरोप है कि सट्टेबाजी से हासिल रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था। कई स्तरों पर लेन-देन के बाद रकम कथित तौर पर हवाला चैनलों से विदेश भेजी जाती थी। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि नेटवर्क को बिना बाधा चलाने के लिए कुछ सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी।
दुर्ग से शुरू हुई जांच, फिर ED और CBI की एंट्री
महादेव ऐप से जुड़े मामले की शुरुआती कार्रवाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से जुड़ी रही। मोहन नगर थाने में दर्ज FIR के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ कथित सट्टा कारोबार और वित्तीय लेन-देन की परतें सामने आने लगीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। बाद में छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर CBI ने भी महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली।
CBI के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर दो मामलों में आरोपी है, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। एजेंसियों ने इस नेटवर्क से जुड़ी भारत और विदेशों में स्थित कई संपत्तियों को भी अटैच किया है।
इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान में पकड़ा गया
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। CBI के अनुसार, इसी नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद भारत की जांच एजेंसियों ने ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजे।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद CBI की विशेष टीम ओमान पहुंची और उसे भारत लेकर आई। यह कार्रवाई भारत और ओमान की एजेंसियों के बीच समन्वय से पूरी हुई।
अब पूछताछ में किन सवालों के जवाब तलाशेगी CBI?
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण पूछताछ है। CBI की जांच के दायरे में कई अहम सवाल हैं—
- महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क किन लोगों के जरिए संचालित होता था?
- देशभर में फैले पैनल और ब्रांच का संचालन कौन करता था?
- सट्टेबाजी से हासिल रकम किन बैंक खातों में भेजी जाती थी?
- कथित हवाला नेटवर्क के जरिए पैसा किन देशों तक पहुंचा?
- सरकारी कर्मचारियों को कथित प्रोटेक्शन मनी देने के आरोपों में किन लोगों की भूमिका थी?
- विदेश में बैठकर नेटवर्क चलाने में किन सहयोगियों ने मदद की?
इन सवालों के जवाब मामले की वित्तीय और आपराधिक कड़ियों को समझने में अहम हो सकते हैं।
महादेव ऐप मामले में आगे क्या?
सौरभ चंद्राकर के भारत लौटने से महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण आरोपी अब भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच में है। CBI और ED पहले से ही इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन, कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
अब चंद्राकर से पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर जांच की अगली दिशा तय होगी। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
