बंगाल-असम से केरल तक ‘छत्तीसगढ़ कनेक्शन’, बाहरी राज्यों में सियासी दमखम दिखा रहे CG के दिग्गज नेता
रायपुर, 23 मार्च 2026। देश के विभिन्न राज्यों में हो रहे चुनावों में इस बार छत्तीसगढ़ के नेताओं की सक्रियता खास चर्चा में है। असम, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस—दोनों दलों ने छत्तीसगढ़ के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में ये चुनाव अब “राज्यों से बाहर छत्तीसगढ़ की राजनीतिक परीक्षा” के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने अपने कई बड़े चेहरों को अलग-अलग राज्यों में उतारा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पिछले दो दिनों से केरल में डटे हुए हैं और पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार के साथ नामांकन कार्यक्रमों में भी शामिल हो रहे हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव को असम की 10 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई है।

इसी कड़ी में मंत्री ओपी चौधरी भी असम में चुनावी कमान संभाले हुए हैं। संगठन स्तर पर भी छत्तीसगढ़ का प्रभाव दिख रहा है, जहां भाजपा के संगठन महामंत्री पवन सहाय पश्चिम बंगाल की लगभग 50 सीटों पर पार्टी की रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं।
वहीं कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम चुनाव का ऑब्जर्वर बनाया गया है और वे लगातार वहां दौरा कर रहे हैं। कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय को भी चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

चुनाव भले ही अन्य राज्यों में हो रहे हों, लेकिन इसकी गूंज छत्तीसगढ़ में भी साफ सुनाई दे रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अजय चंद्राकर ने इन चुनावों को “देश बचाने वाला” करार दिया है, जबकि मंत्री टंकराम वर्मा ने इसे बेहद अहम बताया है। इसके जवाब में कांग्रेस नेता शिव डहरिया ने भाजपा पर राजनीतिक स्वार्थ का आरोप लगाते हुए बयानबाजी को और तेज कर दिया है।
तपती गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ के नेता बंगाल से लेकर असम और केरल तक लगातार प्रचार में जुटे हैं। दोनों ही दलों के नेताओं ने अपनी साख दांव पर लगा दी है। ऐसे में अब नजर चुनाव परिणामों पर टिकी है कि छत्तीसगढ़ के नेताओं की मेहनत दूसरे राज्यों में कितना असर दिखाती है और किसे जीत मिलती है।











