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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जीती तो कौन बनेगा मुख्यमंत्री?… दौड़ में शामिल कांग्रेस के कई दिग्गज, ये हैं ‘सीएम इन वेटिंग’

छत्तीसगढ़ में दो चरणों में हुई वोटिंग के बाद अब लोगों को उस फैसले का इंतजार है जिससे पता चलेगा कि राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह जीत का चौका लगाएंगे या फिर कांग्रेस का 15 सालों का वनवास खत्म होगा | एजेंसियों और टीवी चैनलों में बीते शुक्रवार की शाम एग्जिट पोल आने के बाद छत्तीसगढ़ में नेताओं के जीत के साथ ही इस बात की भी चर्चा शुरू हो गई है कि 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में यदि कांग्रेस को बहुमत मिलता है तो मुख्यमंत्री कौन होगा?

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में परिणाम आने बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री की उम्मीदवारी को लेकर घमासान होने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है | छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, अभी तक कांग्रेस के 4 नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में खुद को सबसे आगे बता रहे हैं | पूरी सक्रियता के साथ कांग्रेसी नेता मुख्यमंत्री पद के लिए जोर आजमाईश लगाना शुरू कर दिए हैं | मुख्यमंत्री के दावेदार कुर्सी की दौड़ में एक-दूसरे को पटखनी देने में जुटे हुए हैं,  कांग्रेस में “सीएम इन वेटिंग” की लंबी कतार से पार्टी के भीतर एकबार फिर गुटबाजी और अंतरकलह उफान पर सकती  आ  है |

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कांग्रेस में ये हैं ‘सीएम इन वेटिंग’

फोटो : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के साथ सांसद ताम्रध्वज साहू

ताम्रध्वज साहू : सौम्य चेहरा और सरल स्वभाव के ताम्रध्वज साहू कांग्रेस में मुख्यमंत्री के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं | ताम्रध्वज साहू फिलहाल छत्तीसगढ़ से एकमात्र लोक सभा सांसद हैं, साथ ही, वे पार्टी के राष्ट्रीय ओबीसी सेल के प्रमुख होने के अलावा कांग्रेस कार्यकारिणी में भी शामिल हैं | कांग्रेस के ओबीसी विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के कारण एक बड़े वर्ग में इनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है | इस चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को संगठित रखा, टिकट वितरण के बाद असंतोष को नहीं बढ़ने दिया, ओबीसी वर्ग खासकर बहुंसख्यक साहू समाज को साधकर रखा | माना जा रहा है कि कांग्रेस को यदि जनादेश मिलता है तो ताम्रध्वज साहू मुख्यमंत्री पद के लिए मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं |

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फोटो : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के साथ नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव

टीएस सिंहदेव : अगर प्रदेश का जनादेश कांग्रेस के पक्ष में जाता है तो मुख्‍यमंत्री पद के लिए सरगुजा के राजा टीएस सिंहदेव की दावेदारी काफी प्रबल है | साल 2013 के चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने इन्हें विधायक दल का नेता बनाया, कांग्रेसियों को एकजुट रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. टीएस बाबा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में रमन सरकार खिलाफ लगातार आक्रामक रहे | 6 फीट लंबे सौम्य चेहरा व सरल स्वभाव के कारण टीएस बाबा सबकी पसंद हैं, इस चुनाव में घोषणा पत्र समिति का अध्यक्ष रहते प्रदेश भर में हर वर्ग तक पहुंचकर उनकी राय ली, मजबूत घोषणा पत्र तैयार किया, जिससे कांग्रेस चुनाव में मजबूत स्थिति में रही | वह रक्सेल 117वें उत्तराधिकारी हैं, सरगुजा के राजपरिवार से आने वाले TS सिंहदेव छत्तीसगढ़ के सबसे अमीर प्रत्याशी हैं | 2008 से TS बाबा विधानसभा में अंबिकापुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उनकी माता देवेंद्र कुमारी मध्य प्रदेश की सिंचाई मंत्री रह चुकी हैं, पिता MS सिंहदेव मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी थे |

फोटो : पीसीसी चीफ भूपेश बघेल

भूपेश बघेल : पिछले चार साल से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस में “सीएम इन वेटिंग” के रूप में दिखे जा रहे हैं |  वह पाटन सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, पुरे चार साल तक राज्य सर्कार के खिलाफ काफी आक्रामकता से अपनी बात रखते दिखाई दिए हैं, पीसीसी चीफ रहते ही उन्होंने कार्यकर्ताओं में जान डाली और प्रदेश में सरकार विरोधी लहर पैदा करने में काफी हद तक सफल मानें जा रहे हैं | पार्टी में रहते हुए भूपेश ने अजीत जोगी और अमित जोगी को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था | 1980 के दशक में दुर्ग जिले के रहने वाले भूपेश यहां के यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने, 2000 में जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना तो वह पाटन से विधायक चुने गए, और जोगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने | 2003 में भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया, अक्तूबर 2014 से वह कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष हैं, 2008 के चुनाव में 9343 वोट से बीजेपी के विजय बघेल से जीते थे, 2013 में पाटन से ही एकबार फिर चुनाव लड़े और 7842 वोटों से बीजेपी के विजय बघेल को फिर शिकस्त दी |  सीडी कांड के चलते पिछले एकसाल से भूपेश बघेल काफी सुर्ख़ियों में बने रहे, इस वजह से भूपेश को जेल भी जाना पड़ा |

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फोटो : पूर्व केंद्रीय मंत्री चरण दास महंत

चरण दास महंत : राज्य के जांजगीर-चांपा जिले की सक्ती विधानसभा सीट पर एक बार फिर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता चरणदास महंत चुनावी मैदान में हैं । चरणदास भी कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी माना जा रहा है । महंत प्रदेश के बहुसंख्यक वर्ग में इनकी अच्छी पकड़ रखते हैं, मध्यप्रदेश सरकार में गृहमंत्री और यूपीए की दूसरी पारी में केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री रहे. इसके अलावा चुनाव में वरिष्ठ नेताओं को एकजुट रखने में भी अहम भूमिका अदा की | महंत के खिलाफ भाजपा ने मेघाराम साहू को उतारा है।  साहू यहां से 2003 में विधायक बने थे । 2008 में ये सीट कांग्रेस के पास थी तो 2013 में फिर से भाजपा ने इस पर कब्जा कर लिया। 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मेघाराम साहू ने इस सीट पर ढ़ाई हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी ।  तब उन्हें 27680 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के मनहारन राठौर को 24408 वोट मिले थे । 2008 में यह सीट कांग्रेस के खाते में चले गई और भाजपा के मेघाराम साहू को कांग्रेस की सरोज राठौर ने लगभग 9 हजार से ज्यादा मतों से हराया । 2013 में साहू ने बाजी पलटते हुए कांग्रेस की सरोज राठौर को लगभग 10 हजार मतों से हराया। इस सीट से एकबार फिर महंत मैदान में हैं |

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