CG News: CM हेल्पलाइन में लापरवाही, PWD के 13 अधिकारियों को नोटिस, तहसीलदार सस्पेंड

रायपुर। सीएम हेल्पलाइन पर जनता की शिकायतों को बिना उचित समाधान के बंद करना अधिकारियों को भारी पड़ गया है। छत्तीसगढ़ में लोक निर्माण विभाग (PWD) ने लापरवाही के मामले में तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारियों समेत 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, शिकायतों के निराकरण में गंभीर लापरवाही के मामले में कबीरधाम जिले के पिपरिया में पदस्थ तहसीलदार प्रमोद कुमार चंद्रवंशी को निलंबित कर दिया गया है।
सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज शिकायतों की अगस्त और सितंबर माह में हुई समीक्षा के दौरान लोक निर्माण विभाग में गड़बड़ी सामने आई। जांच में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर कई शिकायतों को ऐसी टिप्पणियों के साथ बंद कर दिया गया, जिनसे समस्या का वास्तविक समाधान होने की पुष्टि नहीं होती थी। विभाग ने इसे कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
इन 13 अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस
एल-1 स्तर के पांच अधिकारी:
- अतुल राज पेगवार — अनुविभागीय अधिकारी, राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर
- राजेश कुमार बाजपेयी — अनुविभागीय अधिकारी, बेमेतरा उप संभाग
- जगदीश प्रसाद — अनुविभागीय अधिकारी, पेंड्रा उप संभाग
- अशोक कुमार हरियाले — अनुविभागीय अधिकारी, सेतु उप संभाग दुर्ग
- सोनल ढालेन्द्र — अनुविभागीय अधिकारी, पाटन उप संभाग
एल-2 स्तर के पांच अधिकारी:
- केशव प्रसाद लहरे — कार्यपालन अभियंता, बेमेतरा संभाग
- घासीराम जांगड़े — कार्यपालन अभियंता, कोरबा संभाग
- रोशन कुमार साहू — कार्यपालन अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर
- प्यारे लाल पैकरा — कार्यपालन अभियंता, सारंगढ़ संभाग
- प्रज्ञा नंद — कार्यपालन अभियंता, कांकेर संभाग
एल-3 स्तर के तीन अधिकारी:
- डी.के. नेताम — अधीक्षण अभियंता, मंडल क्रमांक-2 रायपुर
- अर्पणा चौरपगार — अधीक्षण अभियंता, दुर्ग मंडल
- महादेव लहरे — अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर
नोटिस में क्या कहा गया?
विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिकायत बंद करते समय अधिकारियों को अपनी टिप्पणी में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्रवाई, उसकी तारीख अथवा समय-सीमा और शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का उल्लेख करना चाहिए। यदि शिकायत किसी दूसरे विभाग से संबंधित है, तो उसका कारण भी स्पष्ट करना जरूरी है।
ऐसी जानकारी के अभाव में शिकायतों के वास्तविक निराकरण की पुष्टि नहीं हो पाती और पोर्टल पर दर्ज समाधान के आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं।
15 दिन में देना होगा जवाब
सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर लोक निर्माण विभाग के सचिव के समक्ष लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने खुद जाना शिकायतों का हाल
शिकायतों के निराकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों के शिकायतकर्ताओं से सीधे बातचीत कर यह जानने का प्रयास किया कि उनकी समस्याओं का समाधान हुआ है या नहीं। इस दौरान कुछ नागरिकों ने निराकरण पर संतुष्टि भी जताई।
वहीं, समीक्षा के दौरान गंभीर लापरवाही पाए जाने पर कबीरधाम जिले के पिपरिया में पदस्थ तहसीलदार प्रमोद कुमार चंद्रवंशी को निलंबित कर दिया गया। सरकार की इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि शिकायतों को केवल पोर्टल पर बंद करने के बजाय उनका वास्तविक समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
