रायपुर में 10 साल बाद प्रॉपर्टी सर्वे! 12 हजार मकानों पर निगम की नजर, कमर्शियल इस्तेमाल मिला तो लगेगा भारी टैक्स

रायपुर। राजधानी में आवासीय मकानों के नाम पर व्यावसायिक कारोबार चलाने वालों पर अब नगर निगम शिकंजा कसने की तैयारी में है। करीब 10 साल बाद रायपुर में संपत्तियों का व्यापक सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में मकान, दुकान, कैफे, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट, किराना और कपड़ों की दुकानों समेत तमाम व्यावसायिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति जांची जाएगी।
नगर निगम के अनुमान के मुताबिक शहर में 12 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां हो सकती हैं, जिनमें टैक्स तो आवासीय दर से जमा किया जा रहा है, लेकिन इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है। निगम का अनुमान है कि इस गड़बड़ी के कारण हर साल करीब 5 से 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
लीडार सर्वे से खुलेगा प्रॉपर्टी का पूरा हिसाब
नगर निगम सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर के पहले सप्ताह से सर्वे शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए लीडार सर्वे कराया जाएगा। कंपनी का चयन होते ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
राजस्व उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा के मुताबिक सिर्फ तकनीकी सर्वे ही नहीं होगा, बल्कि इसके बाद भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। टीम यह जांचेगी कि संपत्ति का वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से हो रहा है और मालिक उसी के अनुरूप टैक्स जमा कर रहा है या नहीं।
घर में दुकान मिली तो आएगा डिमांड नोटिस
यदि रिकॉर्ड में संपत्ति आवासीय है, लेकिन मौके पर वहां व्यावसायिक गतिविधि संचालित मिलती है, तो निगम संबंधित मालिक के खिलाफ कार्रवाई करेगा। ऐसे मामलों में कमर्शियल टैक्स का डिमांड नोटिस और पेनाल्टी जारी की जाएगी। यानी अब घर के नाम पर दुकान, कैफे, ऑफिस या अन्य कारोबार चलाने वालों को अतिरिक्त टैक्स का सामना करना पड़ सकता है।
सर्वे से पहले ही गरमाई सियासत
प्रॉपर्टी सर्वे को लेकर नगर निगम में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि निगम टैक्स वसूली पर तो जोर दे रहा है, लेकिन शहर में जलभराव, बिजली और सड़कों जैसी बुनियादी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
वहीं MIC सदस्य दीपक जायसवाल ने विपक्ष के आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि जिस संपत्ति का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है, उस पर आवासीय टैक्स जमा करना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इसी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।
अब 10 साल पुराने रिकॉर्ड की खुलेगी पोल
सर्वे शुरू होने के बाद यह साफ होगा कि रायपुर में कितनी संपत्तियां कागजों पर आवासीय हैं, लेकिन जमीन पर कमर्शियल इस्तेमाल में हैं। साथ ही निगम को होने वाले राजस्व नुकसान और कार्रवाई के बाद संभावित अतिरिक्त आय की तस्वीर भी सामने आएगी।
