High Court News; शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट सख्त, 90 दिन में नई मेरिट लिस्ट बनाने के दिए निर्देश

बिलासपुर, 21 मई 2026. छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा है कि आरक्षित वर्ग के पदों पर तय नियमों से अलग तरीके से चयन करना समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूरी चयन सूची की समीक्षा कर नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा वर्ष 2019 में व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। भर्ती में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार भी शामिल थे।

याचिका में आरोप लगाया गया कि भर्ती के दौरान ओबीसी वर्ग के लिए निर्धारित पदों में दिव्यांग अभ्यर्थियों को तय सीमा से अधिक समायोजित कर दिया गया। इससे सामान्य OBC वर्ग के कई उम्मीदवार चयन सूची से बाहर हो गए। अभ्यर्थियों का कहना था कि चयन समिति ने नियमों की सही व्याख्या किए बिना नियुक्तियां कर दीं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि चयनित दिव्यांग उम्मीदवार मेरिट में बेहतर स्थान पर थे, इसलिए उन्हें प्राथमिकता दी गई। वहीं याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण को लेकर तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।

पूरे मामले पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सामाजिक आरक्षण और विशेष आरक्षण की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। अदालत ने कहा कि यदि किसी वर्ग का उम्मीदवार अपनी योग्यता के आधार पर बेहतर स्थान हासिल करता है, तो उसके समायोजन में आरक्षण नियमों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अदालत ने माना कि चयन प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि पूरी चयन प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाए और 90 दिनों के भीतर संशोधित मेरिट सूची तैयार कर नई प्रक्रिया लागू की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि भर्ती में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

इस फैसले के बाद शिक्षक भर्ती से जुड़े कई अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं शिक्षा विभाग को अब नई सूची तैयार करने और नियमों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।









