छत्तीसगढ़ के इन गांव तक 8 किमी पैदल चलकर पहली बार कोई कलेक्टर पहुंचा, नदी और घने जंगल करने पड़े पार…फिर इमली के पेड़ के नीचे लगा चौपाल

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में प्रशासन ने एक नई लकीर खींची है। इंद्रावती नदी के पार, घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे उन गांवों तक पहली बार जिला प्रशासन की पहुंच बनी है, जहाँ तक पहुंचने की कल्पना भी कुछ समय पहले तक चुनौतीपूर्ण थी। दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने सरकारी दफ्तर की कुर्सी छोड़कर जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए खुद बीड़ा उठाया और अति-दुर्गम क्षेत्रों का रुख किया।
दंतेवाड़ा, 19 जून 2026. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने 8 किमी पैदल चलकर नक्सल प्रभावित पालोड़ी और भिरसापारा गांवों का दौरा किया। पहली बार प्रशासन को अपने बीच देख ग्रामीण गदगद हुए। कलेक्टर ने इमली के पेड़ के नीचे बैठकर राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं को सुना और त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया।
8 किमी की दुर्गम पैदल यात्रा
गीदम ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले पालोड़ी और भिरसापारा गांवों तक पहुंचने के लिए कलेक्टर को 6 से 8 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय करना पड़ा। यह क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के कारण संवेदनशील रहा है, लेकिन अब बदलती परिस्थितियों में प्रशासन की यह ‘सीधी पहुंच’ इलाके में विकास और विश्वास की नई उम्मीद जगा रही है।

जन-संवाद: पेड़ की छांव में बैठ जानी समस्याएं
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने इन गांवों में पहुंचकर न केवल अधिकारियों से रिपोर्ट ली, बल्कि एक सहज जनसेवक की तरह इमली के पेड़ की छांव में जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने:
बुनियादी सुविधाओं का जायजा: बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी प्राथमिक जरूरतों की वास्तविकता को समझा।
राशन की पुख्ता व्यवस्था: बरसात के चार महीनों में सुचारू राशन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
स्वास्थ्य और पोषण पर जोर: आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा की।
आवागमन की चुनौती पर मिला आश्वासन
गुमलनार ग्राम पंचायत की सरपंच मालती इस्तामी ने बारिश के दौरान इंद्रावती नदी में जलस्तर बढ़ने से होने वाली आवागमन की समस्या को प्रमुखता से रखा। इस पर कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि आवागमन की बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस समाधान तलाशा जाएगा।

‘पहली बार’ कलेक्टर को देख ग्रामीणों में खुशी
ग्रामीणों के लिए यह पल ऐतिहासिक था। ग्रामीणों ने बताया कि जिले के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई कलेक्टर खुद उनके गांव तक चलकर पहुंचा है। वनांचल में प्रशासन और जनता के बीच बढ़ता यह आपसी भरोसा दंतेवाड़ा में एक सुखद बदलाव का संकेत है, जिसकी चारों ओर सराहना हो रही है।
