CG Fake Medical Bill Scam: 30 लाख के फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में टीचर्स एसोसिएशन के ब्लॉक अध्यक्ष गिरफ्तार, अब अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी

बिलासपुर, 5 अगस्त 2026। शिक्षा विभाग में सामने आए करीब 30 लाख रुपये के कथित फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में पुलिस ने पहली बड़ी गिरफ्तारी करते हुए मुख्य आरोपी शिक्षक साधे लाल पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। साधे लाल पटेल छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के बिल्हा ब्लॉक अध्यक्ष भी हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच अब पूरे नेटवर्क की ओर बढ़ गई है। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि फर्जी मेडिकल बिलों के जरिए सरकारी राशि निकालने के इस खेल में और कौन-कौन शामिल था।
सूत्रों के अनुसार, फर्जी मेडिकल बिल तैयार कर उन्हें विकासखंड शिक्षा कार्यालय से जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय और वहां से राज्य स्तर तक भेजा गया। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर करीब 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर विकासखंड शिक्षा कार्यालय तक पहुंचाई गई। प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
जिला अस्पताल ने बताया फर्जी, फिर दर्ज हुई एफआईआर
मामले की शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया। जांच के दौरान जिला चिकित्सालय ने संबंधित मेडिकल बिलों को फर्जी करार देते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की। इसके बाद संयुक्त संचालक (जेडी) और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।
हालांकि एफआईआर दर्ज होने में देरी भी हुई। शुरुआती दौर में थाना सिटी कोतवाली में मूल दस्तावेजों के बजाय केवल फोटोकॉपी जमा कराई गई थी। पुलिस ने मूल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा। बाद में विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पत्नी और साले के खातों तक पहुंची जांच
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पैसों के लेनदेन की परतें खोल रही है। सूत्रों के मुताबिक, फर्जी मेडिकल बिलों के आधार पर जारी राशि का हिस्सा साधे लाल पटेल की पत्नी और उनके साले के बैंक खातों में भी पहुंचा है। पुलिस बैंक खातों, ट्रांजेक्शन और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। यदि जांच में इन खातों के जरिए रकम के लेनदेन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में
जांच का दायरा अब केवल मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, उस समय पदस्थ रहे तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। आरोप है कि कार्यालय स्तर पर दस्तावेजों के परीक्षण और स्वीकृति के बाद ही राज्य शासन से राशि जारी हुई थी। ऐसे में यह जांच की जा रही है कि कहीं इस पूरे मामले में अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं थी।
और बढ़ सकती हैं गिरफ्तारियां
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और दस्तावेजों के साथ बैंकिंग रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही अन्य लोगों से पूछताछ की जा सकती है। यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग में सामने आए इस बहुचर्चित फर्जी मेडिकल बिल घोटाले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।
