कौन हैं छत्तीसगढ़ के ये डिप्टी कलेक्टर? 24 घंटे Z+सुरक्षा घेरे में….ऑफिस से दौरे तक सुरक्षा का लाव-लश्कर, आगे पायलट, पीछे हथियारबंद जवान, जानिये

रायपुर@cgnews24.com/ छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में एक अधिकारी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा है। यह मामला है झीरम घाटी नक्सली हमले में मारे गए बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा के बेटे आशीष कर्मा का। राज्य प्रशासनिक सेवा में अधिकारी आशीष कर्मा को लेकर चर्चा इसलिए है क्योंकि उनकी सुरक्षा व्यवस्था इतनी व्यापक बताई जाती है कि सामान्य प्रशासनिक कामकाज और फील्ड में जिम्मेदारी संभालने के बीच व्यावहारिक मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं।
आशीष कर्मा को वर्ष 2019 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति देते हुए डिप्टी कलेक्टर बनाया था। महेंद्र कर्मा की 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमले के दौरान हत्या कर दी गई थी। हमले के बाद कर्मा परिवार को नक्सली खतरे के मद्देनजर जेड-प्लस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। उस समय केंद्र और राज्य स्तर पर परिवार की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।
परिवार को मिली सुरक्षा, आशीष के साथ भी जारी रहा सुरक्षा घेरा
महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा और उनके बेटों को हमले के बाद सुरक्षा दी गई थी। परिवार को जेड-प्लस सुरक्षा दिए जाने की खबरें जून 2013 में राष्ट्रीय मीडिया में भी प्रकाशित हुई थीं। बाद में आशीष कर्मा प्रशासनिक सेवा में आ गए, लेकिन परिवार की सुरक्षा व्यवस्था के साथ उनका नाम भी जुड़ा रहा।
बताया जाता है कि आशीष कर्मा के साथ कार्यालय और दौरे के दौरान भी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहती है। उनके वाहन के आगे पायलट वाहन और पीछे सुरक्षा जवानों की गाड़ी चलने जैसी व्यवस्था का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, वर्तमान में उनके साथ कितने जवान तैनात हैं और सुरक्षा का आधिकारिक स्तर क्या है, इसकी पुष्टि संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से होना बाकी है।
सुरक्षा और फील्ड पोस्टिंग के बीच पेच
प्रशासनिक हलकों में चर्चा का दूसरा पहलू उनकी पदस्थापना से जुड़ा है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के तौर पर फील्ड में एसडीएम की जिम्मेदारी संभालना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर अधिकारी को लगातार क्षेत्र का दौरा करना पड़ता है, आम लोगों से मिलना होता है और कानून-व्यवस्था से लेकर राजस्व मामलों तक सीधे हस्तक्षेप करना पड़ता है।
ऐसे में यदि किसी अधिकारी के साथ बड़ा सुरक्षा काफिला चलता है तो दौरे और आम लोगों से मुलाकात के दौरान अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं। इसी वजह से यह सवाल उठता रहा है कि क्या भारी सुरक्षा व्यवस्था उनकी फील्ड पोस्टिंग के रास्ते में व्यावहारिक अड़चन बन रही है?
आशीष कर्मा की पदस्थापना को लेकर यह भी चर्चा है कि सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें अब तक एसडीएम जैसी मैदानी जिम्मेदारी नहीं मिल सकी। हालांकि, उनकी पोस्टिंग के पीछे यही एकमात्र कारण है, ऐसा कोई आधिकारिक आदेश या बयान सामने नहीं आया है।
अब सुरक्षा श्रेणी घटने की चर्चा
अब प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा है कि आशीष कर्मा की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया जा सकता है। जेड-प्लस से जेड श्रेणी में सुरक्षा घटाए जाने की अटकलों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसके बाद उन्हें मैदानी जिम्मेदारी दी जाएगी।
सुरक्षा श्रेणी का निर्धारण खतरे के आकलन के आधार पर होता है। इसलिए इसमें बदलाव का फैसला भी संबंधित एजेंसियों की समीक्षा और सक्षम स्तर की मंजूरी के बाद ही संभव है। फिलहाल सुरक्षा घटाने के किसी आधिकारिक आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
महेंद्र कर्मा की हत्या के बाद उनके परिवार को सुरक्षा देना उस समय की गंभीर परिस्थितियों से जुड़ा फैसला था। लेकिन सात साल से अधिक समय से प्रशासनिक सेवा में काम कर रहे आशीष कर्मा के मामले में अब सवाल यह है कि सुरक्षा की जरूरत और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
