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सत्ता के शिखर पर बैठे 9 मुख्यमंत्रियों ने रचाई दूसरी शादी, किसी ने CM हाउस में लिए सात फेरे तो किसी की शादी ने बदल दी सियासत!…उमर अब्दुल्ला से भगवंत मान तक, जानिए 9 नेताओं की  दिलचस्प कहानियां


उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी के बाद फिर चर्चा में आया राजनीतिक गलियारों का निजी जीवन। भगवंत मान से एनटी रामाराव तक, किसी ने तलाक के बाद चुना नया जीवनसाथी तो किसी ने पहली पत्नी के निधन के बाद की दूसरी शादी। कुछ शादियां सत्ता के दौरान हुईं, तो कुछ ने राजनीति में बड़े विवादों को जन्म दिया।

नई दिल्ली। राजनीति में नेताओं की जिंदगी आमतौर पर उनके फैसलों, बयानों, चुनावी रणनीतियों और सत्ता के समीकरणों से पहचानी जाती है। लेकिन कई बार इन नेताओं की निजी जिंदगी भी ऐसी कहानी बन जाती है, जिसकी गूंज राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच तक सुनाई देती है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान से दूसरी शादी ने इन दिनों इसी चर्चा को फिर हवा दे दी है। 30 अक्टूबर 2026 को दोनों ने विवाह किया और 31 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया। उमर की पहली शादी पायल नाथ से 1994 में हुई थी। दोनों के बीच लंबे समय से अलगाव था और 31 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने पर सहमति बनी थी।

लेकिन उमर अब्दुल्ला इस कहानी के अकेले किरदार नहीं हैं। भारतीय राजनीति में ऐसे कई मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं, जिन्होंने पहली शादी के बाद अपनी जिंदगी में नया अध्याय शुरू किया। किसी ने जीवनसाथी के निधन के बाद दूसरा विवाह किया, किसी ने तलाक के बाद और किसी की निजी जिंदगी ने पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष तक को जन्म दे दिया।

इस सूची में नौ चर्चित नाम हैं। इनकी कहानियां बताती हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी सार्वजनिक होती है, लेकिन उसके पीछे का निजी जीवन कई बार बेहद अलग और जटिल होता है।

1. भगवंत मान: मुख्यमंत्री आवास में हुई दूसरी शादी, देशभर में हुई चर्चा

Punjab CM Bhagwant Mann Marries Gurpreet Kaur; Raghav Chadha, Kejriwal Attend

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की दूसरी शादी इस सूची के सबसे चर्चित उदाहरणों में शामिल है। 7 जुलाई 2022 को उन्होंने डॉ. गुरप्रीत कौर के साथ विवाह किया था। उस समय वह पंजाब के मुख्यमंत्री थे।

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भगवंत मान की पहली शादी इंद्रप्रीत कौर से हुई थी। इस विवाह से उनके दो बच्चे हैं। वर्ष 2015 में दोनों का तलाक हो गया था। इसके करीब सात साल बाद भगवंत मान ने दूसरी शादी का फैसला किया।

चंडीगढ़ में हुए इस विवाह समारोह में परिवार के सदस्यों के साथ आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस समारोह का हिस्सा बने।

इस शादी की खास बात यह थी कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने अपने निजी जीवन के इस बड़े फैसले को बेहद सादे पारिवारिक समारोह के रूप में पूरा किया।

2. डॉ. यशवंत सिंह परमार: 65 साल की उम्र में मुख्यमंत्री आवास से निकली बारात

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हिमाचल प्रदेश के निर्माता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की दूसरी शादी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

वर्ष 1974 में जब डॉ. परमार की उम्र करीब 65 वर्ष थी, तब उन्होंने सत्यवती डांग के साथ विवाह किया। उनकी पहली पत्नी चंद्रवती परमार का निधन हो चुका था। सत्यवती डांग भी अपने पति को खोने के बाद अकेले जीवन बिता रही थीं।

इस रिश्ते की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि शादी के लिए दोनों परिवारों के बच्चों ने भी पहल की थी। डॉ. परमार के बेटे ने उन्हें दोबारा विवाह के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ओक ओवर से बारात निकली और सत्यवती डांग के आवास ग्रैंड लॉज पहुंची। इस शादी में परिवार के बच्चे और पोते-पोतियां भी शामिल हुए।

सत्यवती डांग खुद भी राजनीति में सक्रिय थीं और राज्यसभा सदस्य रह चुकी थीं। यह विवाह उस दौर में हुआ, जब सामाजिक रूढ़ियों के कारण उम्र के इस पड़ाव पर दूसरी शादी करना आसान नहीं माना जाता था।

3. वीरभद्र सिंह: हिमाचल की राजनीति के दो बड़े नाम एक रिश्ते में जुड़े

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हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह ने वर्ष 1985 में प्रतिभा सिंह के साथ दूसरी शादी की थी।

वीरभद्र सिंह की पहली पत्नी रत्ना कुमारी का वर्ष 1983 में निधन हो गया था। इसके बाद उन्होंने प्रतिभा सिंह के साथ नया जीवन शुरू किया। उस समय वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

इस रिश्ते की राजनीतिक अहमियत भी कम नहीं रही। प्रतिभा सिंह ने आगे चलकर सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वह मंडी लोकसभा सीट से सांसद बनीं और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।

उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह भी हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। इस तरह यह रिश्ता केवल एक पारिवारिक कहानी नहीं रहा, बल्कि हिमाचल की राजनीति में एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के रूप में भी सामने आया।

4. एचडी कुमारस्वामी: अभिनेत्री राधिका के साथ रिश्ते ने खड़ा किया बड़ा विवाद

कौन हैं राधि‍का जिनसे शादी को लेकर चर्चा में रहे हैं कुमारस्वामी? - who is radhika kumaraswamy hd kumaraswamy wife or not karnataka election photos tmov - AajTak

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की निजी जिंदगी का यह अध्याय सबसे विवादित कहानियों में गिना जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुमारस्वामी और कन्नड़ अभिनेत्री राधिका के बीच वर्ष 2006 के आसपास विवाह हुआ था। उस समय कुमारस्वामी कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे। इस रिश्ते का सार्वजनिक खुलासा काफी बाद में हुआ और वर्ष 2010 में राधिका ने विवाह की जानकारी सामने रखी।

लेकिन इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी और तथ्यात्मक पेच भी है। कुमारस्वामी की पहली पत्नी अनीता कुमारस्वामी के साथ उनका विवाह मौजूद था। वर्ष 2018 में द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में भी अनीता को उनकी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी बताया गया था। इसलिए इस रिश्ते को निर्विवाद रूप से कानूनी दूसरी शादी कहना उचित नहीं होगा।

राजनीति में इस मामले की चर्चा तब और तेज हुई, जब कुमारस्वामी दोबारा मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे थे।

5. नारायण दत्त तिवारी: 88 साल की उम्र में रचाई शादी, निजी जिंदगी का पुराना विवाद भी हुआ खत्म

Just married! ND Tiwari ties the knot with Ujjwala Sharma - India Today

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी की कहानी भी इस सूची में खास है। वह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके थे। उनकी पहली पत्नी सुशीला का वर्ष 1991 में निधन हो गया था।

इसके बाद उनकी जिंदगी में उज्ज्वला शर्मा आईं। दोनों के रिश्ते को लेकर लंबे समय तक विवाद और कानूनी चर्चाएं होती रहीं। उज्ज्वला शर्मा के बेटे रोहित शेखर की पितृत्व पहचान को लेकर भी मामला अदालत तक पहुंचा था।

बाद में नारायण दत्त तिवारी ने रोहित शेखर को अपना जैविक पुत्र स्वीकार किया। 15 मई 2014 को 88 वर्ष की उम्र में उन्होंने उज्ज्वला शर्मा के साथ विवाह किया।

इस शादी की चर्चा केवल उम्र की वजह से नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे वर्षों से चल रहे पारिवारिक और कानूनी विवादों का इतिहास भी था।

6. बिप्लब कुमार देब: मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद अभिनेत्री से शादी

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त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब की दूसरी शादी भी वर्ष 2026 में चर्चा में आई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिप्लब कुमार देब ने 19 जून 2026 को कन्नड़ अभिनेत्री त्रिवेणी राव के साथ विवाह किया। इससे पहले उनका विवाह नीति देब से हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका पहला वैवाहिक रिश्ता वर्ष 2025 में समाप्त हुआ था।

बिप्लब देब वर्ष 2018 से 2022 तक त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका जारी रखी।

अभिनेत्री त्रिवेणी राव के साथ उनकी शादी की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक और मनोरंजन जगत दोनों में चर्चा शुरू हो गई। यह उन उदाहरणों में शामिल है, जहां सत्ता का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नेता ने निजी जिंदगी में नई शुरुआत की।

7. एनटी रामाराव: दूसरी शादी के बाद परिवार से शुरू हुआ सत्ता संघर्ष, आंध्र की राजनीति में आया भूचाल

Ram Gopal Varma’s NTR biopic titled Lakshmi’s NTR stirs controversy| Entertainment News

भारतीय राजनीति में दूसरी शादी और सत्ता के टकराव का सबसे चर्चित उदाहरण आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार एनटी रामाराव यानी एनटीआर का माना जाता है।

एनटीआर की पहली पत्नी बसव तारकम का वर्ष 1985 में कैंसर के कारण निधन हो गया था। इसके करीब आठ साल बाद वर्ष 1993 में उन्होंने तेलुगु लेखिका लक्ष्मी पार्वती से विवाह किया।

लक्ष्मी पार्वती एनटीआर की जीवनी लिख रही थीं। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में उन्होंने शादी कर ली।

लेकिन इस विवाह का असर सिर्फ उनके पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं रहा। एनटीआर की दूसरी शादी के बाद परिवार और पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हुईं। उनके दामाद एन. चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी के भीतर अपने समर्थकों को एकजुट किया।

वर्ष 1995 में तेलुगु देशम पार्टी के भीतर बड़ा विद्रोह हुआ। चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में पार्टी के विधायकों ने एनटीआर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सत्ता की कमान उनके हाथों में चली गई।

एनटीआर की दूसरी शादी इस राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी, हालांकि सत्ता संघर्ष के पीछे पार्टी नेतृत्व, परिवार और राजनीतिक नियंत्रण से जुड़े कई दूसरे कारण भी थे।

यह वह उदाहरण है, जहां एक नेता की निजी जिंदगी और पार्टी के भीतर सत्ता की लड़ाई एक-दूसरे से जुड़कर भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक अध्याय बन गई।

8. मुलायम सिंह यादव: साधना गुप्ता के रिश्ते ने परिवार और राजनीति दोनों में बनाई जगह

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समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की निजी जिंदगी भी लंबे समय तक राजनीतिक चर्चा का विषय रही।

मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी थीं। साधना गुप्ता के साथ उनके रिश्ते को लेकर लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से चर्चा होती रही। दोनों के बेटे प्रतीक यादव हैं।

वर्ष 2003 में मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता की शादी की बात सामने आई। इसी वर्ष मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती देवी का निधन भी हुआ था।

बाद के वर्षों में साधना गुप्ता को मुलायम परिवार में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया। इस रिश्ते का उल्लेख परिवार और समाजवादी पार्टी की राजनीति से जुड़ी चर्चाओं में भी होता रहा।

यह कहानी बताती है कि भारतीय राजनीति में परिवार केवल निजी दायरे तक सीमित नहीं रहता। कई बार पारिवारिक रिश्ते भी राजनीतिक विरासत और नेतृत्व की चर्चाओं का हिस्सा बन जाते हैं।

9. दिग्विजय सिंह: 68 साल की उम्र में पत्रकार अमृता राय से विवाह

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की दूसरी शादी भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही।

दिग्विजय सिंह की पहली पत्नी आशा सिंह का फरवरी 2013 में कैंसर के कारण निधन हो गया था। इसके बाद उनकी नजदीकियां वरिष्ठ टीवी पत्रकार अमृता राय के साथ चर्चा में आईं।

वर्ष 2014 में दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। इसके बाद सितंबर 2015 में चेन्नई में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों ने विवाह किया।

उस समय दिग्विजय सिंह की उम्र करीब 68 वर्ष थी, जबकि अमृता राय उनसे उम्र में काफी छोटी थीं। दोनों के बीच उम्र के अंतर को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खूब बहस हुई।

दिग्विजय सिंह ने आलोचनाओं के बावजूद अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया और विवाह किया।

उमर अब्दुल्ला: नई शादी के साथ फिर सुर्खियों में आए मुख्यमंत्री

Photo Of Ex-NDTV Journalist Nidhi Razdan Sitting In Front Rows At Omar Abdullah’s Swearing-In Ceremony Sparks Dating Speculation

अब इस चर्चा के केंद्र में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हैं। वरिष्ठ पत्रकार और टीवी एंकर निधि राजदान के साथ उनकी शादी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू कर दी है।

उमर और पायल नाथ की शादी वर्ष 1994 में हुई थी। दोनों के दो बेटे जाहिर और जमीर हैं। वर्ष 2009 से दोनों अलग रह रहे थे और जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के सामने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का रास्ता साफ हुआ।

इसके बाद 30 अक्टूबर 2026 को उमर और निधि ने शादी की। अगले दिन दोनों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं।

उमर ने तस्वीर के साथ लिखा, A new journey began yesterday, जबकि निधि राजदान ने अपने अंदाज में लिखा, It’s done bro।

इस घोषणा के बाद दोनों के रिश्ते और भारतीय राजनीति में दूसरी शादी करने वाले मुख्यमंत्रियों की कहानियां एक बार फिर चर्चा में आ गईं।

इन शादियों के पीछे छिपे हैं तीन अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पहलू

इन नौ नेताओं की कहानियों को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं होगा। इनके पीछे परिस्थितियां अलग-अलग थीं।

पहला पहलू—जीवनसाथी के निधन के बाद नई शुरुआत। यशवंत सिंह परमार, वीरभद्र सिंह, एनटी रामाराव और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी शादी की।

दूसरा पहलू—तलाक के बाद नई जिंदगी। भगवंत मान और उमर अब्दुल्ला के मामले में पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त होने के बाद दूसरी शादी हुई।

तीसरा पहलू—निजी रिश्ते और सत्ता का टकराव। एनटी रामाराव का मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उनकी दूसरी शादी के बाद परिवार और पार्टी में असंतोष बढ़ा और अंततः आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन हुआ।

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि मुख्यमंत्री रहते हुए दूसरी शादी करने वाले नेताओं की सूची केवल इन नामों तक सीमित नहीं है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत का नाम भी इस संदर्भ में सामने आता है। उन्होंने 1988 में जयश्री गोस्वामी महंत से विवाह किया था। इसलिए नौ नेताओं वाली सूची को संपूर्ण ऐतिहासिक सूची नहीं माना जाना चाहिए।

सियासत में नेता जनता के सामने अपने फैसलों का हिसाब देते हैं, लेकिन उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा से बाहर नहीं रह पाती। किसी के लिए दूसरी शादी जीवन का नया अध्याय होती है, तो किसी के लिए वही रिश्ता राजनीतिक इतिहास का हिस्सा बन जाता है। उमर अब्दुल्ला की नई शुरुआत ने एक बार फिर यही दिखाया है कि सत्ता के गलियारों में भी निजी जिंदगी की कहानियां कभी-कभी सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरती हैं।

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