PM-USHA से छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की तस्वीर बदलेगी: 33 जिलों के कॉलेजों को करोड़ों का अनुदान, 5 लाख छात्र होंगे लाभान्वित


रायपुर, 22 जून 2026. छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा जगत में एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है। वर्ष 2014 से 2026 के बीच केंद्र सरकार से मिली प्रमुख स्वीकृतियों और सौगातों की शृंखला में ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान’ (PM-USHA) राज्य के लिए वरदान साबित हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की NAAC ग्रेडिंग में सुधार तथा अनुसंधान (Research) के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारी-भरकम वित्तीय अनुदान की स्वीकृति दी गई है। यह योजना पूर्ववर्ती राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का ही एक परिष्कृत और अधिक उन्नत रूप है।

अधोसंरचना विकास के लिए मिला ‘मेगा बजट’

इस योजना के तहत देश भर के लिए कुल 12,926.10 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस विशाल बजट का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा छत्तीसगढ़ के हिस्से आया है।

योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चयनित पात्र शासकीय विश्वविद्यालयों को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटीज़ (MERU) के अंतर्गत प्रति संस्थान 20 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक का भारी-भरकम अनुदान मिल रहा है। वहीं, चिन्हित शासकीय महाविद्यालयों को बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए 5 करोड़ रुपए तक का प्रोजेक्ट-बेस्ड अनुदान स्वीकृत किया जा रहा है।

इस वित्तीय भार का वहन केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात (60% केंद्रांश और 40% राज्यांश) में किया जा रहा है।

धरातल पर उतरी योजना: स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक लैब का निर्माण जारी

छत्तीसगढ़ में यह योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर तेजी से प्रगति कर रही है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) निष्पादित किया जा चुका है।

वर्तमान में चयनित कॉलेजों द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। इसके साथ ही राज्य के शिक्षण संस्थानों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक लैब और कंप्यूटर सेंटर जैसे अत्याधुनिक अधोसंरचना निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

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बस्तर से सरगुजा तक सभी 33 जिलों को मिल रहा है सीधा लाभ

PM-USHA योजना का सबसे खूबसूरत पहलू इसका समावेशी स्वरूप है। इस परियोजना का लाभ छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों को मिल रहा है।

योजना के तहत विशेष रूप से राज्य के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों, दूरस्थ अंचलों, बस्तर संभाग, सरगुजा संभाग, कम सकल नामांकन अनुपात (GER) वाले क्षेत्रों तथा आकांक्षी जिलों जैसे धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद के शासकीय कॉलेजों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है, ताकि विकास की दौड़ में पीछे छूटे क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाया जा सके।

5 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के सपनों को उड़ान

इस दूरदर्शी परियोजना से राज्य के विभिन्न शासकीय शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत 5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और महिला वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिल रहा है।

अब छत्तीसगढ़ के वनांचलों और दूरदराज के गांवों के युवाओं को भी वैश्विक स्तर की आधुनिक शिक्षा, उन्नत अनुसंधान सुविधाएं और बेहतर शैक्षणिक संसाधन अपने ही राज्य में सुलभ हो रहे हैं, जो उनके सुनहरे भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं।

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