ढाई साल में श्रमिक कल्याण को नई दिशा: 17.82 लाख श्रमिकों को मिला लाभ, ₹800 करोड़ से अधिक की सहायता

रायपुर, 7 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल करते हुए सामाजिक सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पारदर्शिता पर आधारित व्यवस्था विकसित की है। श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ तेज और सरल तरीके से पहुंचाने के लिए कई सुधार किए हैं।
67 योजनाओं से श्रमिकों को मिल रहा लाभ
राज्य में संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों के पंजीयन और योजनाओं का लाभ आसान बनाने के लिए श्रम विभाग ने नई यूजर-फ्रेंडली वेबसाइट और ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप विकसित किया है, जिससे ऑनलाइन पंजीयन, आवेदन और अन्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालय
पिछले ढाई वर्षों में राज्य के पांच नए जिलों में श्रम अधिकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए 20 नए पद सृजित किए गए। वर्तमान में 10 जिलों में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और 23 जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित हैं। इसके साथ ही विभिन्न पदों पर नियुक्तियां कर विभागीय क्षमता भी बढ़ाई गई है।
17.82 लाख श्रमिकों को मिला लाभ
1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच करीब 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। इसी अवधि में 17.82 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ पहुंचाया गया, जिन पर 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। निर्माण श्रमिकों को लगभग 780 करोड़ रुपये तथा असंगठित श्रमिकों को 187 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। लाभ वितरण के लिए डीबीटी (Direct Benefit Transfer) प्रणाली लागू की गई है।
24×7 संचालित हो रहे श्रमिक सहायता केंद्र
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्रों को सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे संचालित किया है। मोबाइल शिविरों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
महिला श्रमिकों और परिवारों को विशेष लाभ
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता दी गई है। इसके अलावा ‘शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ के तहत पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, मेधावी शिक्षा सहायता और निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग जैसी योजनाओं का भी संचालन किया जा रहा है।
राज्य सरकार का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था, तकनीकी नवाचार, त्वरित सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है तथा लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन में विश्वास और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया है।
