Bilaspur Crime: महिला परामर्श केंद्र के रजिस्टर में कथित हेरफेर का आरोप, शिक्षिका और काउंसलर पर FIR; कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
सिविल लाइन पुलिस ने BNS की धारा 337 और 340 के तहत दर्ज किया मामला, काउंसिलिंग रजिस्टर और दस्तावेजों की जांच शुरू

बिलासपुर, 21 सितंबर 2026। महिला परामर्श केंद्र के काउंसिलिंग रजिस्टर में कथित तौर पर काट-छांट और दस्तावेजों में हेरफेर के मामले में सिविल लाइन पुलिस ने एक शिक्षिका और महिला थाना की काउंसलर के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। न्यायालय के आदेश के पालन में पुलिस ने रीतू पाण्डेय (मिश्रा) और काउंसलर आशा सिंह के खिलाफ BNS की धारा 337 और 340 के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस अब काउंसिलिंग रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।
शिकायतकर्ता सुधांशु मिश्रा के अनुसार, उनकी पत्नी रीतू पाण्डेय मिश्रा रायगढ़ के केंद्रीय विद्यालय में प्राथमिक शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि पारिवारिक विवाद के बाद उनकी पत्नी की ओर से महिला परामर्श केंद्र में शिकायत की गई थी। 12 जून 2023 को हुई अंतिम काउंसिलिंग में महिला थाना की काउंसलर आशा सिंह ने दोनों पक्षों की काउंसलिंग की थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस दौरान काउंसिलिंग रजिस्टर में उनकी पत्नी की ओर से महिला थाना में चल रहे प्रकरण को खारिज कराने की बात दर्ज की गई थी। उनके मुताबिक, इस प्रविष्टि पर पति-पत्नी और काउंसलर के हस्ताक्षर भी थे।
प्रमाणित प्रति और चालान में अंतर का दावा
सुधांशु मिश्रा का आरोप है कि बाद में उनकी पत्नी की ओर से सरकंडा थाने में पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया गया। इसके बाद जब उन्होंने काउंसिलिंग से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति और चालान का अवलोकन किया, तो दोनों में अंतर सामने आया।
शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर काउंसिलिंग रजिस्टर में कथित काट-छांट और दस्तावेजों में हेरफेर किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।
IG-SP से शिकायत के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने मामले में आईजी, एसपी और महिला थाना में शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया। अधिवक्ता धनंजय मिश्रा के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट कुमारी रिया चक्रवर्ती के आदेश के बाद सिविल लाइन पुलिस ने 18 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 1282 दर्ज किया।
पुराने 498-A मामले का भी जिक्र
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि उनकी पत्नी की ओर से दर्ज कराया गया पूर्व 498-A प्रकरण हाईकोर्ट से खारिज हो चुका है। हालांकि, इस दावे और दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल पुलिस काउंसिलिंग रजिस्टर, प्रमाणित प्रतियों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच में जुटी है। दस्तावेजों में वास्तव में हेरफेर हुआ या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
