महासमुंद जेल में कैदी की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, पोस्टमार्टम में मिले 35 चोटों के निशान; CS और DGP से मांगा जवाब

बिलासपुर, 20 अगस्त 2026। महासमुंद जिला जेल में न्यायिक अभिरक्षा के दौरान एक कैदी की मौत के मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हत्या के मामले में जेल में बंद आरोपी के पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर 35 चोटों के निशान मिलने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को यह बताना होगा कि धारा 302 के मामले में जेल में बंद आरोपी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके शरीर पर इतनी चोटें कैसे आईं।
हिरासत में हिंसा पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि हिरासत में हिंसा और मौत की घटनाएं कानून के शासन पर गंभीर आघात हैं। जेल या पुलिस लॉकअप में बंद व्यक्ति पूरी तरह राज्य के संरक्षण में होता है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है। ऐसे में वर्दी और अधिकार की आड़ में होने वाली किसी भी हिंसा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के लहरा बाई तामरे बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले का भी हवाला दिया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत की जांच CBI से कराने का आदेश दिया था। साथ ही पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया था।
परिजनों को 7.50 लाख रुपये मुआवजा
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि मृतक के परिवार को 7.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। जिला जेल महासमुंद के सहायक जेल अधीक्षक की 21 सितंबर 2025 की सूचना के अनुसार, यह राशि 20 सितंबर 2025 को परिवार को भुगतान की गई थी।
हालांकि, मुआवजा दिए जाने के बावजूद हाईकोर्ट ने मौत की परिस्थितियों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज 35 चोटों के निशानों को गंभीरता से लेते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।
31 अगस्त को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और DGP को व्यक्तिगत शपथ पत्र के जरिए यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि जेल में बंद आरोपी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर 35 चोटों के निशान कैसे पाए गए। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी।
