GGU विवाद: कुलपति चक्रवाल को पद से हटाने की मांग, विधायक ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; पूरे कार्यकाल की जांच की मांग

बिलासपुर: गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान एक साहित्यकार को कथित तौर पर अपमानित कर बाहर निकालने के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कोटा क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस घटना को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कुलपति को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
यूनिवर्सिटी में आयोजित एक ‘राष्ट्रीय परिसंवाद’ (समकालीन हिन्दी कहानी बदलते जीवन संदर्भ) के दौरान कुलपति प्रो. चक्रवाल पर एक साहित्यकार के साथ अभद्र व्यवहार करने और उन्हें कार्यक्रम से बाहर निकालने का आरोप है। विधायक अटल श्रीवास्तव का कहना है कि एक शैक्षणिक मंच को विवाद का केंद्र बनाना और अतिथियों के साथ ऐसा व्यवहार करना पद की गरिमा के विरुद्ध है।
विधायक की राष्ट्रपति से प्रमुख मांगें
विधायक अटल श्रीवास्तव ने गुरुवार को राष्ट्रपति, जो कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति होती हैं, को पत्र लिखकर निम्नलिखित मांगें की हैं:
पद से बर्खास्तगी: कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल को उनके पद से तत्काल हटाया जाए।
कार्यकाल की जांच: कुलपति के पूरे कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों और निर्णयों की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच हो।
नियुक्तियों पर सवाल: पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रो. चक्रवाल के कार्यकाल में हुई प्राध्यापकों की नियुक्तियां भी विवादित रही हैं और उनमें लेनदेन के आरोप लगते रहे हैं।
गरिमा को ठेस: इस घटना से न केवल यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है, बल्कि देश भर से आए साहित्यकारों और शिक्षाविदों में भी भारी रोष है।
संस्थान की छवि पर असर
विधायक ने पत्र में जोर दिया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में कुलपति का आचरण आदर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। उनके अनुसार, वर्तमान घटना ने यूनिवर्सिटी की अकादमिक स्वतंत्रता और सम्मानजनक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
“कुलपति का आचरण अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंवैधानिक रहा है। उनके व्यवहार से विश्वविद्यालय का नाम खराब हो रहा है, इसलिए उनके कार्यकाल की समस्त नियुक्तियों और आदेशों की जांच अनिवार्य है।” — अटल श्रीवास्तव, विधायक, कोटा









