दो बेटियां पटवारी, बेटा नायब तहसीलदार… अब ED की नजर! पूर्व पटवारी संघ अध्यक्ष कमलेश राजपूत के घर रेड, CGPSC केस में बढ़ी हलचल
सिकोला भाठा के बंगाली कॉलोनी स्थित घर पहुंची ED की टीम, दस्तावेजों की जांच और कुछ रिकॉर्ड जब्त किए जाने की जानकारी; परिवार के सरकारी पदों को लेकर भी उठे सवाल

दुर्ग, 2 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े मनी लॉड्रिंग मामले की जांच अब दुर्ग में पूर्व पटवारी संघ प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह राजपूत के घर तक पहुंच गई है। मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने सिकोला भाठा स्थित बंगाली कॉलोनी में कमलेश सिंह राजपूत के निवास पर दबिश दी।
करीब आठ अधिकारियों की टीम दो वाहनों से उनके घर पहुंची। कई घंटे तक दस्तावेजों और विभिन्न रिकॉर्ड की जांच की गई। कार्रवाई के दौरान कुछ दस्तावेज अपने साथ ले जाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
ED की इस कार्रवाई ने CGPSC मामले की जांच को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर राजपूत के घर से ED क्या तलाश रही थी और जांच की अगली कड़ी किस दिशा में जाएगी?
पटवारी संघ की राजनीति से ED की जांच तक पहुंचा नाम
कमलेश सिंह राजपूत लंबे समय तक पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। CGPSC मामले की जांच के दौरान उनका नाम सामने आने के बाद अब ED की कार्रवाई ने इस मामले को और चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, सिर्फ ED की दबिश को किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। फिलहाल एजेंसी की ओर से कमलेश सिंह राजपूत के खिलाफ लगाए गए किसी अंतिम आरोप या जांच के निष्कर्ष की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
लेकिन जांच टीम का उनके आवास तक पहुंचना यह संकेत जरूर देता है कि एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय कड़ियों की पड़ताल कर रही है।
परिवार के सरकारी पद भी जांच के घेरे में चर्चा में
ED की कार्रवाई के बाद कमलेश सिंह राजपूत के परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परिवार के सदस्यों में दीपाली राजपूत उपपंजीयक, निवेदिता राजपूत पटवारी, स्वप्निल सिंह राजपूत पटवारी और योगेश सिंह राजपूत नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं।
हालांकि, इन नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सिर्फ पारिवारिक संबंध या सरकारी पद पर होने के आधार पर किसी नियुक्ति को संदिग्ध मानना उचित नहीं होगा।
अब असली सवाल यह है कि क्या ED की जांच इन नियुक्तियों से संबंधित किसी दस्तावेज या वित्तीय लेन-देन तक पहुंचती है या कार्रवाई केवल CGPSC मामले से जुड़े रिकॉर्ड तक सीमित रहती है।
नियुक्तियों से संपत्तियों तक… क्या बढ़ेगा जांच का दायरा?
ED की कार्रवाई के बाद एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है—परिवार की आर्थिक गतिविधियां और संपत्तियां। यदि जांच एजेंसी को दस्तावेजों से कोई वित्तीय कड़ी मिलती है, तो जमीन, मकान, प्लॉट या अन्य अचल संपत्तियों की खरीद, रजिस्ट्री, भुगतान और आय के स्रोतों का मिलान जांच का हिस्सा बन सकता है।
खास तौर पर उन संपत्तियों और लेन-देन की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है, जिनका संबंध जांच के दायरे में आने वाले समय और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से हो।
हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाणित सार्वजनिक दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर कमलेश सिंह राजपूत या उनके परिवार की किसी संपत्ति को अवैध अथवा आय से अधिक घोषित किया जा सके।
ED की रेड में क्या मिला?
मंगलवार की कार्रवाई के दौरान ED अधिकारियों ने घर में मौजूद विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। कुछ दस्तावेज अपने साथ ले जाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
अब इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ED को किस तरह के रिकॉर्ड मिले और उनका CGPSC मामले से क्या संबंध है। यही दस्तावेज आगे की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं।
CGPSC जांच में पहले ही तेज हो चुकी है कार्रवाई
CGPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच पहले से तेज है। मनी लॉड्रिंग के एंगल से ED की कार्रवाई के बीच कई लोगों से पूछताछ और अलग-अलग स्थानों पर तलाशी की कार्रवाई हो चुकी है। जांच एजेंसी कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया, उम्मीदवारों से जुड़े लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इसी क्रम में दुर्ग में कमलेश सिंह राजपूत के घर हुई कार्रवाई को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सवाल—ED को किस कड़ी की तलाश?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कमलेश सिंह राजपूत के घर तक पहुंची ED की जांच आखिर किस कड़ी की तलाश में है? क्या मामला केवल CGPSC से जुड़े दस्तावेजों तक सीमित रहेगा या फिर जांच का दायरा परिवार के आर्थिक लेन-देन और अन्य रिकॉर्ड तक पहुंचेगा? क्या घर से मिले दस्तावेज किसी नए व्यक्ति, लेन-देन या संपत्ति से जुड़ी जानकारी सामने लाएंगे? इन सवालों के जवाब ED की आगे की जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही सामने आएंगे। फिलहाल इतना जरूर है कि CGPSC मामले की जांच अब एक और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है और दुर्ग में हुई यह कार्रवाई आने वाले दिनों में कई नए खुलासों की भूमिका तैयार कर सकती है।
