BJP में बड़े फेरबदल की आहट! किरणदेव की सेहत से लेकर ‘एक व्यक्ति-एक पद’ तक… किन नेताओं पर टिकी नजर?

रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। प्रदेशाध्यक्ष किरणदेव की स्वास्थ्य स्थिति, 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां और पार्टी की ‘एक व्यक्ति-एक पद’ की नीति के बीच संगठन में कुछ महत्वपूर्ण पदों पर फेरबदल की चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि भाजपा की ओर से फिलहाल प्रदेशाध्यक्ष बदलने को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है और पार्टी नेता भी इस संभावना से इनकार कर रहे हैं। इसके बावजूद संगठन के भीतर संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं जरूर तेज हैं।
किरणदेव की वापसी पर टिकी सबसे बड़ी नजर
झांसी के पास सड़क हादसे में घायल होने के बाद किरणदेव का झांसी मेडिकल कॉलेज के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उपचार हुआ था। उनके पैर और कमर के नीचे ऑपरेशन किया गया है। फिलहाल वे करीब पखवाड़े से नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ निवास में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
23 अगस्त को ऑपरेशन के बाद उनके टांके खोले जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में उनके इसी महीने छत्तीसगढ़ लौटने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि पूरी तरह स्वस्थ होकर नियमित राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय होने में अभी कुछ समय लग सकता है। यही स्थिति भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सक्रियता लौटी तो तस्वीर अलग, वरना विकल्प पर विचार?
भाजपा के भीतर चर्चा है कि यदि किरणदेव जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर संगठन में सक्रिय हो जाते हैं तो प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन यदि स्वास्थ्य कारणों से उन्हें लंबे समय तक आराम की जरूरत पड़ती है और वे संगठन की नियमित गतिविधियों में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाते हैं, तो पार्टी नेतृत्व किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर सकता है।
हालांकि यह फिलहाल सिर्फ संगठन के भीतर चल रही चर्चा और संभावित राजनीतिक समीकरण हैं। भाजपा ने प्रदेशाध्यक्ष बदलने को लेकर कोई निर्णय घोषित नहीं किया है।
2027 के विधानसभा चुनाव में अब करीब दो साल का समय बचा है। ऐसे में भाजपा संगठन के लिए आने वाले महीनों को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने और चुनावी तैयारियों को समय रहते मजबूत करने की है।
जनवरी 2027 से चुनावी मोड में आने की तैयारी
भाजपा संगठन के जानकारों के मुताबिक आने वाले महीनों में मोर्चा, प्रकोष्ठ और अन्य संगठनात्मक इकाइयों की कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया पूरी की जानी है।
पार्टी दिसंबर तक अधिकांश संगठनात्मक प्रक्रियाएं पूरी करने और इसके बाद जनवरी 2027 से चुनावी तैयारियों को पूरी गति देने की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी में बताई जा रही है। ऐसे में प्रदेश संगठन के प्रमुख पदों पर मौजूद नेताओं की सक्रियता और उपलब्धता भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
रूपकुमारी चौधरी के बाद प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर भी नजर
भाजपा में संभावित बदलाव की चर्चा सिर्फ प्रदेशाध्यक्ष तक सीमित नहीं है। सांसद रूपकुमारी चौधरी के भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके प्रदेश उपाध्यक्ष पद को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पार्टी की ‘एक व्यक्ति-एक पद’ की परंपरा के तहत यदि वे प्रदेश उपाध्यक्ष पद से मुक्त होती हैं तो उनकी जगह किसी अन्य नेता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
इस बदलाव के साथ प्रदेश संगठन में एक और महत्वपूर्ण समीकरण बदल सकता है।
दीपक म्हस्के की जिम्मेदारी भी चर्चा में
सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के को राष्ट्रीय स्तर पर सोशल मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके मौजूदा पद को लेकर भी संगठन के भीतर चर्चा है।
यदि पार्टी की ‘एक व्यक्ति-एक पद’ नीति के तहत बदलाव किया जाता है, तो आने वाले समय में उनके पद पर भी नए चेहरे को जिम्मेदारी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रदेश उपाध्यक्ष का एक पद पहले से खाली
प्रदेश संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष का एक पद पहले से रिक्त है। भाजपा संगठन में कुल छह उपाध्यक्ष पद हैं, ऐसे में एक पद खाली होने से फिलहाल कामकाज पर बड़ा असर नहीं माना जा रहा है।
फिर भी पार्टी लंबे समय तक यह पद रिक्त रखने के पक्ष में नहीं दिख रही है। इसकी वजह यह है कि प्रदेश उपाध्यक्षों को विधानसभा क्षेत्रों और जिलों की संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी सौंपी जाती हैं।
हाल ही में नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में प्रदेशाध्यक्ष की अनुपस्थिति में प्रदेश उपाध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था।
अब किरणदेव की वापसी बताएगी संगठन की दिशा
फिलहाल भाजपा संगठन में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच सबसे ज्यादा नजर किरणदेव की स्वास्थ्य स्थिति और उनकी राजनीतिक सक्रियता पर है।
यदि वे जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ होकर संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने लगते हैं तो मौजूदा व्यवस्था जारी रहने की संभावना ज्यादा होगी। लेकिन यदि स्वास्थ्य कारणों से उनकी सक्रियता प्रभावित होती है, तो पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने के लिए विकल्प तलाशने की स्थिति बन सकती है।
प्रदेशाध्यक्ष से लेकर उपाध्यक्षों और विभिन्न संगठनात्मक पदों तक संभावित बदलाव की चर्चाओं ने भाजपा के भीतर सियासी हलचल जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को ही करना है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।
