Bilaspur News; जातिगत प्रताड़ना के आरोपों पर घिरे जिला पंचायत CEO, FIR की मांग; बसपा ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

बिलासपुर। जिला पंचायत के पंचायत सचिव तुलसी ध्रुव के निलंबन के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने निलंबन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) संदीप अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बसपा जिला अध्यक्ष हेमचंद मिरी के नेतृत्व में पार्टी ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
बसपा का आरोप है कि 24 अप्रैल 2026 को सकरी स्थित जन चेतना केंद्र में आयोजित बैठक के दौरान पंचायत सचिव तुलसी ध्रुव के साथ जातिगत रूप से अपमानजनक व्यवहार किया गया। पार्टी के मुताबिक, बैठक में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में तुलसी ध्रुव को बाहर निकाल दिया गया। ज्ञापन में बताया गया है कि तुलसी ध्रुव गोंड समाज से आते हैं।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
बसपा ने ज्ञापन में दावा किया है कि कथित घटना के बाद तुलसी ध्रुव उसी दिन सकरी थाना पहुंचे और शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इसके बाद 27 अप्रैल को अनुसूचित जाति-जनजाति समाज संयुक्त मोर्चा, तखतपुर की ओर से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई थी।
पार्टी ने ग्राम पंचायत नगाई में जांच के लिए गठित आठ सदस्यीय दल की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया है। बसपा का कहना है कि बिना किसी शिकायत के जांच शुरू किए जाने की प्रक्रिया की वैधानिकता भी स्पष्ट होनी चाहिए।
जांच के बाद सचिव पर ही कार्रवाई
ज्ञापन के अनुसार, मामले में 9 जून को दोबारा जांच कराई गई। इसके बाद 13 जुलाई को तुलसी ध्रुव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और 27 जुलाई को उन्होंने अपना जवाब प्रस्तुत किया। इसके बाद 3 अगस्त को तुलसी ध्रुव को निलंबित कर दिया गया।
बसपा ने इसी कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सचिव की ओर से जातिगत प्रताड़ना की शिकायत की गई थी, तो जांच के दौरान शिकायतकर्ता पर ही कार्रवाई क्यों की गई।
सात दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
बसपा ने जिला पंचायत CEO संदीप अग्रवाल के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने, उन्हें निलंबित करने और सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है। पार्टी ने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि निर्धारित समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जिला इकाई आंदोलन करेगी। बसपा ने चेतावनी दी है कि इसके बाद होने वाले आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
हालांकि, मामले में बसपा की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। जिला पंचायत CEO और प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद उसे भी समाचार में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।
