बिलासपुर में भड़का प्रतियोगी युवाओं का गुस्सा! हाथों में मोमबत्तियां, सरकार के खिलाफ नारेबाजी; शिक्षक भर्ती पर उठाए सवाल

बिलासपुर। सालों की तैयारी, भर्ती का इंतजार और फिर परीक्षा प्रक्रिया पर अनिश्चितता! प्रतियोगी युवाओं की इसी बेचैनी ने रविवार रात बिलासपुर की सड़कों पर विरोध का रूप ले लिया। गांधी चौक पर जुटे अभ्यर्थियों ने कैंडल मार्च निकालकर अपना आक्रोश जताया। हाथों में जलती मोमबत्तियां थीं और निशाने पर परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, भर्ती में देरी तथा आरक्षण विवाद का अब तक समाधान नहीं होना था।
प्रदर्शनकारी युवाओं ने सरकार से सवाल किया कि जब आरक्षण नियमों का पालन करना जरूरी था, तो परीक्षा प्रक्रिया शुरू करने से पहले सभी पहलुओं की जांच क्यों नहीं की गई? अभ्यर्थियों ने मांग की कि विवाद का जल्द समाधान कर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए और परीक्षा की नई तारीख घोषित की जाए।
गांधी चौक पर जुटे अभ्यर्थी, नारेबाजी कर जताई नाराजगी
रविवार देर शाम बड़ी संख्या में प्रतियोगी युवक-युवतियां गांधी चौक पर एकत्रित हुए। इसके बाद उन्होंने कैंडल मार्च निकालकर परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण उनकी तैयारी और भविष्य दोनों अनिश्चितता के घेरे में हैं। उनका कहना है कि समय पर निर्णय नहीं होने से युवाओं को लगातार इंतजार करना पड़ रहा है।
‘परीक्षा से पहले नियमों की जांच क्यों नहीं हुई?’
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का सबसे बड़ा सवाल यही था कि आरक्षण संबंधी नियमों और प्रावधानों की जांच परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने से पहले क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते सभी पहलुओं पर स्पष्टता बनाई जाती, तो आज अभ्यर्थियों को इस तरह की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, परीक्षा और भर्ती से जुड़ी प्रक्रियाओं में देरी का सीधा असर उन युवाओं पर पड़ता है, जो नौकरी की उम्मीद में लंबे समय से मेहनत कर रहे हैं।
सालों की तैयारी पर अनिश्चितता का साया
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए समय बेहद अहम होता है। कई अभ्यर्थी वर्षों तक पढ़ाई, कोचिंग और परीक्षा की तैयारी में जुटे रहते हैं। ऐसे में परीक्षा की तारीख स्पष्ट नहीं होने और भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से उनकी चिंता बढ़ रही है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती में देरी केवल रोजगार का मामला नहीं है, बल्कि युवाओं के समय, आर्थिक स्थिति और भविष्य से भी जुड़ी हुई है। इसी वजह से वे चाहते हैं कि सरकार इस मुद्दे पर जल्द स्पष्ट निर्णय ले।
अभ्यर्थियों की तीन प्रमुख मांगें
कैंडल मार्च के जरिए युवाओं ने सरकार के सामने मुख्य रूप से तीन मांगें रखीं:
- आरक्षण विवाद का जल्द समाधान किया जाए।
- शिक्षक भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए, ताकि नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो।
- परीक्षा की नई तारीख घोषित की जाए, जिससे अभ्यर्थी अपनी तैयारी की योजना बना सकें।
अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
बिलासपुर में हुआ यह प्रदर्शन प्रतियोगी युवाओं की बढ़ती बेचैनी को सामने लाता है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि परीक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि लंबे समय से बनी अनिश्चितता खत्म हो सके।
अब देखना होगा कि आरक्षण विवाद और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और अभ्यर्थियों को परीक्षा की नई तारीख के लिए कितना इंतजार करना पड़ता है।
