छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू: धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026….जबरन धर्मांतरण पर 10 साल जेल, सामूहिक धर्मांतरण पर उम्रकैद तक का प्रावधान
रायपुर 16 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 को लागू कर दिया है। इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी गई है। 10 जुलाई 2026 से यह कानून पूरे राज्य में प्रभावी हो गया है। नए कानून के तहत बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
अधिनियम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बल, लालच, धोखाधड़ी या अन्य अवैध माध्यमों से किसी का धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 से 10 वर्ष तक के कारावास की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये के जुर्माने का सामना करना होगा।
महिलाओं, नाबालिगों तथा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों के धर्म परिवर्तन के मामलों में कानून और अधिक कठोर है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 से 20 वर्ष तक की सजा दी जा सकेगी।
सामूहिक धर्मांतरण पर उम्रकैद तक
नए कानून में सामूहिक धर्मांतरण को गंभीर अपराध माना गया है। यदि किसी मामले में सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह हुआ तो हो सकता है शून्य
अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी विवाह का मुख्य उद्देश्य केवल धर्म परिवर्तन कराना पाया जाता है, तो संबंधित विवाह को अदालत द्वारा शून्य (Void) घोषित किया जा सकेगा। ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष न्यायालय का रुख कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था धोखे, दबाव या छल के जरिए कराए जाने वाले विवाहों को रोकने के उद्देश्य से बनाई गई है।
कानून की प्रमुख बातें
- बल, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने पर 7–10 वर्ष की सजा।
- न्यूनतम 5 लाख रुपये का जुर्माना।
- महिला, नाबालिग, SC/ST/OBC पीड़ित होने पर 10–20 वर्ष की सजा।
- सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक जुर्माना।
- धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए गए विवाह को अदालत शून्य घोषित कर सकती है।

