143 दिन की जांच, 939 पन्नों की चार्जशीट…अफीम कांड में BJP नेता विनायक ताम्रकार को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने दी जमानत
मक्के की फसल के बीच अफीम की कथित खेती से मचा था हड़कंप, 143 दिन की जांच के बाद दाखिल हुई 939 पन्नों की चार्जशीट; अब अदालत में होगी मामले की सुनवाई

बिलासपुर, 2 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के चर्चित समोदा अफीम कांड में बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने मामले में विनायक ताम्रकार को जमानत दे दी है। समोदा गांव में मक्के की फसल की आड़ में कथित तौर पर अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने 6 मार्च को बड़ी कार्रवाई की थी।
इस कार्रवाई के बाद मामला प्रदेशभर में चर्चा में आ गया था। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और मामले की परतें खोलने का दावा किया। अब हाईकोर्ट से विनायक ताम्रकार को जमानत मिलने के बाद इस मामले की कानूनी लड़ाई का अगला चरण शुरू होने जा रहा है।
8 आरोपी गिरफ्तार, 2 अब भी फरार
अफीम की कथित अवैध खेती से जुड़े इस मामले में पुलिस अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 2 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। विनायक ताम्रकार समेत अब तक 5 आरोपियों को अलग-अलग स्तर पर जमानत मिल चुकी है। मामले में पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई हैं।
143 दिन की जांच के बाद 939 पन्नों की चार्जशीट
समोदा अफीम कांड की जांच पूरी करने में पुलिस को करीब 143 दिन लगे। जांच के बाद पुलिस ने कोर्ट में लगभग 939 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
चार्जशीट में मामले से जुड़े आरोपियों, कथित अफीम की खेती और पुलिस जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को शामिल किए जाने की जानकारी है। अब अदालत में इसी चार्जशीट के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
9 सितंबर से नियमित ट्रायल
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई नियमित ट्रायल के चरण में प्रवेश करने जा रही है। जानकारी के मुताबिक 9 सितंबर से मामले का नियमित ट्रायल शुरू होगा।
ऐसे में विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से क्या साक्ष्य और दलीलें पेश की जाती हैं और बचाव पक्ष किस आधार पर अपना पक्ष रखता है।
मक्के के खेत में अफीम की खेती ने खींचा था ध्यान
समोदा गांव में मक्के की फसल के बीच कथित तौर पर अफीम की खेती किए जाने की खबर सामने आने के बाद पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। कार्रवाई के बाद मामले में लगातार गिरफ्तारियां होती रहीं और जांच आगे बढ़ती गई।
अब चार्जशीट दाखिल होने और हाईकोर्ट से आरोपियों में से एक को जमानत मिलने के बाद मामला पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है।
अब कोर्ट में तय होगी आरोपों की दिशा
हाईकोर्ट से जमानत मिलना मामले से आरोपों के खत्म होने के बराबर नहीं है। अब नियमित ट्रायल के दौरान अदालत के सामने पेश होने वाले दस्तावेज, गवाह और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। 9 सितंबर से शुरू होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि अभियोजन के आरोप किस हद तक साबित हो पाते हैं। समोदा अफीम कांड में अब तक हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह मामला कानूनी रूप से भी अहम मोड़ पर पहुंच गया है।
