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PCOD-PCOS , जानिए क्यों, आज महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है PCOD-PCOS की बीमारी,

आज महिलाओं में PCOS -PCOD की प्रॉब्लम तेजी से बढ़ती जा रही है, ख़राब लाइफ स्टाइल और अपने सेहत का ठीक से ख्याल नहीं रख पाने की वजह से 13 साल की लड़की से लेकर 45 वर्ष तक की महिलाओं में PCOS – PCOD की प्रॉब्लम देखा जा रहा है, पिछले कुछ सालों में ये समस्या काफी तेजी से बढ़ी है.

PCOS में महिलाओं के शरीर में सामान्य की तुलना में बहुत अधिक हार्मोन्स बनते हैं, हार्मोन में इस असंतुलन की वजह से एक ओवुलेशन होता है जिसकी वजह से पीरियड्स नियमित नहीं रहते हैं, वजन बढ़ना शुरू हो जाता है, चेहरे पर एकने जाता है , फेस पर या शरीर के किसी ऐसे हिस्से पर हेयर आ जाता है जहां आना नहीं चाहिए, इसके साथ ही पकस में कई तरह की प्रॉब्लम होने लगता है,
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पीसीओडी की बीमारी क्यों तेजी से बढ़ रही है
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पीसीओडी बीमारी होने का कोई एक कारण नहीं है. खराब लाइफस्टाइल, बिगड़ा खानपान, मेंटल स्ट्रेस, धूम्रपान और शराब ज्यादा पीने से यह बीमारी हो सकती है. पिछले कुछ सालों में महिलाओं की खराब लाइफस्टाइल और सोने-जागने का समय तय न होने से इसका खतरा बढ़ रहा है. कुछ मामलों में ये जेनेटिक वजह से भी हो सकती है. डॉक्टर का कहना है इस बीमारी की वजह से महिलाओं में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है. जिससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. चेहरे पर बाल आना, पीरियड पैटर्न खराब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

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भारत में बढ़ता जा रहा है PCOD
मई 2022 में भारत में महिलाओं में PCOD की बढ़ती तादाद पर यूनिसेफ की रिपोर्ट सामने आई, जिसके मुताबिक दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में लगभग 9.13 प्रतिशत महिलाएं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीड़ित हैं, जबकि 22.5 प्रतिशत को पीसीओडी है. भारत के ज्यादातर इलाकों में पीसीओएस बढ़ता जा रहा है. आंकड़ों के अनुसार, भारत में पीसीओएस 3.7% से 22.5% (1.3-7.9 crore) महिलाएं इस बिमारी से पीड़ित है. 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच में से एक महिला को पीसीओडी है. 20 से 35 साल की महिलाएं सबसे ज्यादा इस बिमारी का शिकार हो रही हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर लगभग 116 मिलियन महिलाएं (3.4%) पीसीओएस से प्रभावित हैं..

इस बीमारी का पता कैसे लगाएं।
इस बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर पेल्विस टेस्ट कराते हैं। इस टेस्ट में डॉक्टर वजाइना से ग्लोव्ड फिंगर्स डालकर जांच करते हैं जिससे कोई परेशानी नहीं होती।
ब्लड टेस्ट करके भी इस बीमारी का पता लगाया जाता है।
ओवरी और यूटेरस में असमान्य फॉलिकल्स और परेशानी की जांच करने के लिए अल्ट्रासॉउन्ड किया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड की मदद से बीमारी का पता आसानी से लग सकता है।

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PCOD की पहचान कैसे होती है
डॉक्टरों का कहना है कि आमतौर पर उन महिलाओं में पीसीओडी की समस्या की पहचान होती है, जिनमें तीन लक्षणों में से कम से कम दो नजर आ रहे हों. ये तीन लक्षण हाई एंड्रोजन लेवल, समय पर पीरियड्स का न आना और ओवरी में सिस्ट यानी गांठ पड़ना है. ऐसा होने पर पैल्विक जांच होती है. इसके अलावा कई टेस्ट किए जाते हैं. जिनमें कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन और ट्राइग्लिसराइड टेस्ट होते हैं. एक अल्ट्रासाउंड भी डॉक्टर करवाते हैं, जिससे अंडाशय और गर्भाशय की जांच की जाती है.

महिलाओं में पीसीओडी समस्या के लक्षण (Symptoms of PCOD problem in females)
अनियमित मासिक धर्म
महिलाओं के मासिक धर्म अनियमित हो सकते हैं, यानी कि मासिक धर्म की तारीखें अचानक बदल सकती हैं या आने-जाने लग सकती हैं। कभी पीरियड एक महीने नहीं आते एक साल तक पीरियड नहीं आता,

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हिरसूटिज्म (यौनक्षमता वृद्धि)
पीसीओडी के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों पर अत्यधिक बाल विकसित हो सकते हैं, जैसे कि चेहरे, छाती और पेट पर, ये पकस के प्रमुख लक्षणों में से एक है,

वजन बढ़ना
पीसीओडी के प्रभाव से महिलाओं को असामान्य तरीके से वजन बढ़ सकता है, खासकर पेट क्षेत्र में। पकस से पीड़ित फीमेल्स में अधिक वजन का बढ़ना पाया गया है
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त्वचा समस्याएं
त्वचा में मुंहासे और एक्ने की समस्या हो सकती है, जिनको पकस पकड़ है उनके फेस पर एकने होना शुरू हो जाता है

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