CG-जंगलों में मचा “हरियाली का कत्लेआम”; 100+ कीमती पेड़ों की बड़ी तस्करी….बीट गार्ड सस्पेंड, रेंजर व डिप्टी रेंजर पर कार्रवाई की अनुशंसा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 27 अप्रैल 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जंगलों में लंबे समय से बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई जारी थी। गौरेला वन परिक्षेत्र के पीपरखूंटी बीट में तस्करों ने संगठित तरीके से सागौन और सरई जैसे कीमती पेड़ों को काटकर ठिकाने लगा दिया। बताया जा रहा है कि यह सिलसिला पिछले दो से तीन महीनों से लगातार चल रहा था।
ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस अवैध गतिविधि की जानकारी समय रहते वन विभाग को दे दी थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। आरोप है कि विभाग की लापरवाही का फायदा उठाकर तस्कर बेखौफ होकर जंगल साफ करते रहे।

जांच में मिले 100 से ज्यादा पेड़ों के ठूंठ
जब मामला उच्च स्तर तक पहुंचा, तब रायपुर से स्टेट फ्लाइंग स्क्वाड की टीम को मौके पर भेजा गया। जांच के दौरान टीम ने जंगल में 122 कटे पेड़ के जड़ का हिस्सा बरामद हुआ, जिससे पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया। आशंका है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।


प्रशासन की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बीट गार्ड दीपक सिदार को निलंबित कर दिया है। वहीं गौरेला रेंजर प्रबल दुबे और डिप्टी रेंजर राजकुमार रजक के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी गई है।
विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र मरवाही वनमंडल मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर और बिलासपुर-जबलपुर मुख्य मार्ग से सटा हुआ है। इसके बावजूद इतनी बड़ी घटना का समय रहते पता नहीं चलना विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी तस्करी संभव नहीं है।

जांच जारी, बड़े खुलासों की संभावना
फिलहाल, फ्लाइंग स्क्वाड की टीम पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो इस मामले में तस्करों के साथ-साथ विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारियों पर भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।










