अब घर-जमीन की मालकिन बन रहीं महिलाएं! CG में महिला संपत्ति पंजीयन 51% बढ़ा, ₹76.95 करोड़ की सीधी बचत

साय सरकार की 50% रजिस्ट्रेशन फीस छूट का बड़ा असर, महिलाओं की खरीदार हिस्सेदारी 32% से बढ़कर 41% पहुंची


रायपुर, 21 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर सरकार की पहल का असर अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर 50 प्रतिशत पंजीयन शुल्क में छूट देने के बाद प्रदेश में महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और पंजीकृत कराने के मामलों में करीब 51 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के तुलनात्मक आंकड़ों के मुताबिक 6 मई से 27 जुलाई 2026 के बीच महिलाओं के नाम 30,720 दस्तावेज पंजीकृत हुए। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 20,319 था। यानी महज एक साल में महिलाओं के नाम पंजीयन में 10,401 दस्तावेजों की बढ़ोतरी हुई है।

32% से 41% हुई महिलाओं की हिस्सेदारी

आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं की खरीदार के रूप में हिस्सेदारी में देखने को मिला है।

6 मई से 27 जुलाई 2025 के बीच कुल 63,174 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए थे, जिनमें 20,319 में महिलाएं खरीदार थीं। महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 32 प्रतिशत थी।

वहीं 2026 में इसी अवधि के दौरान कुल 74,424 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए, जिनमें 30,720 दस्तावेज महिलाओं के पक्ष में थे। इससे महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई।

यानी एक साल में महिलाओं की संपत्ति खरीद में हिस्सेदारी 9 प्रतिशत अंक बढ़ गई।

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रायपुर से बिलासपुर तक दिखा असर

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में यह उछाल केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है।

कुछ प्रमुख जिलों के आंकड़े देखें तो—

जिला 2025 2026
रायपुर 4,220 6,038
बिलासपुर 1,894 2,958
जांजगीर-चांपा 1,239 2,302

जांजगीर-चांपा, बालोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर समेत कई जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी सामने आई है।

सरकार की छूट से लोगों को ₹76.95 करोड़ का फायदा

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा दी जा रही 50 प्रतिशत शुल्क छूट का सीधा आर्थिक लाभ भी लोगों को मिला है।

6 मई से 27 जुलाई 2026 के बीच इस छूट के जरिए नागरिकों को कुल 76 करोड़ 95 लाख 33 हजार 689 रुपये, यानी करीब ₹76.95 करोड़ की आर्थिक राहत मिली है।

CM साय बोले- संपत्ति का मालिकाना हक महिलाओं की ताकत बढ़ाता है

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें परिवार तथा समाज में समान अवसर देना है। इसी उद्देश्य से महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर 50 प्रतिशत शुल्क छूट का निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि परिवार अब महिलाओं के नाम संपत्ति का स्वामित्व देने के लिए आगे आ रहे हैं। संपत्ति का मालिकाना हक महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में मजबूत भूमिका देता है।

OP चौधरी बोले- बदल रही सामाजिक और आर्थिक सोच

वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई वृद्धि प्रदेश में सामाजिक और आर्थिक सोच में आ रहे सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

उन्होंने कहा कि पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट ने परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित किया है।

महिला सशक्तिकरण से संपत्ति के मालिकाना हक तक

सरकार की यह पहल अब केवल शुल्क में राहत तक सीमित नहीं दिखाई दे रही, बल्कि महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है।

आंकड़ों में बढ़ोतरी बताती है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार अब महिलाओं को घर, जमीन और अन्य संपत्तियों में मालिकाना हक देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होने के साथ परिवार में उनकी निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ सकती है।यानी ‘नारी सशक्तिकरण’ अब सिर्फ योजनाओं तक नहीं, बल्कि घर-जमीन की रजिस्ट्री में भी दिखाई देने लगा है।

cgnews24 Team

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