NCP नेता जग्गी हत्याकांड की फिर से खुलेगी फाइल, 22 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ी कानूनी हलचल देखने को मिल रही है। करीब 22 साल पुराने इस मामले की फाइल दोबारा खुलने जा रही है और अब 1 अप्रैल को बिलासपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केस रीओपन
दरअसल, इस मामले में पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए सीबीआई की अपील को बहाल कर दिया और मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेज दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इतने गंभीर आपराधिक मामले को केवल तकनीकी कारणों से खारिज नहीं किया जा सकता और इसकी मेरिट पर सुनवाई जरूरी है।
क्या है पूरा मामला
- 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या हुई थी।
- शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की, बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया।
- सीबीआई ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर साजिश के आरोप लगाए।
- 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन अमित जोगी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया।
इसके खिलाफ राज्य सरकार, पीड़ित परिवार और सीबीआई ने अपील की थी, जो हाईकोर्ट में खारिज हो गई थी।
अब क्या होगा आगे
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब हाईकोर्ट में इस केस की दोबारा मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी। सभी पक्षों—सीबीआई, राज्य सरकार, पीड़ित परिवार और आरोपियों—को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
क्यों अहम है यह सुनवाई
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़ा हाई-प्रोफाइल केस रहा है। ऐसे में 1 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे इस लंबे समय से लंबित केस में नई दिशा तय हो सकती है।










