Mahadev Satta Case: आज रायपुर पहुंचेगा सट्टा किंग सौरभ चंद्राकर, शाम 4:50 बजे CBI लेकर आएगी; रिमांड पर पूछताछ की तैयारी, कई बड़े नाम रडार पर

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब छत्तीसगढ़ में इस केस को लेकर हलचल तेज हो गई है। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद CBI की टीम मंगलवार को उसे लेकर रायपुर पहुंचने वाली है। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, शाम 4:50 बजे उसका रायपुर आगमन होगा। इसके बाद उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा।
सौरभ की पेशी को महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले की जांच का बेहद अहम पड़ाव माना जा रहा है। CBI अदालत से उसकी पुलिस रिमांड मांग सकती है। यदि एजेंसी को पूछताछ के लिए हिरासत मिलती है तो सट्टेबाजी के कारोबार, करोड़ों के लेन-देन, हवाला नेटवर्क और कथित संरक्षण देने वालों से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशे जा सकते हैं।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से मिली दो दिन की ट्रांजिट रिमांड
सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर को ओमान से भारत लाया गया था। इसके बाद 2 नवंबर को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। CBI ने उसे रायपुर ले जाकर संबंधित विशेष अदालत में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड मांगी थी।
अदालत ने CBI की मांग स्वीकार करते हुए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को 4 नवंबर या उससे पहले रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाए।
प्रत्यर्पण की शर्तों पर बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
इस मामले में कानूनी पेच भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। दिल्ली कोर्ट में सौरभ के वकील ने दलील दी थी कि ओमान से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया मुख्य रूप से ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आधार पर हुई है। ऐसे में CBI के मामलों में उसकी गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई को लेकर कानूनी सवाल उठते हैं।
बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण के बाद दूसरे मामलों में मुकदमा चलाने पर लागू होने वाले Doctrine of Speciality का हवाला दिया।
वहीं CBI ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उसके खिलाफ रायपुर में पहले से मामले दर्ज हैं और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। दिल्ली की अदालत ने इस कानूनी विवाद का अंतिम फैसला रायपुर की विशेष अदालत पर छोड़ दिया है। अब इस मुद्दे पर रायपुर कोर्ट की भूमिका अहम होगी।
कैसे खड़ा हुआ महादेव ऑनलाइन सट्टे का साम्राज्य?
CBI की जांच के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल पर महादेव ऑनलाइन बुक नाम से कथित अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट चलाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क का संचालन विदेश से किया जाता था और भारत के अलग-अलग राज्यों में पैनल तथा ब्रांच के जरिए इसका विस्तार किया गया था।
इस प्लेटफॉर्म पर क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन दांव लगाए जाते थे। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर पैनल संचालक ग्राहकों को जोड़ते और सट्टे की रकम इकट्ठा करते थे।
CBI के मुताबिक, इस कारोबार से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। जांच एजेंसी ने सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों का न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।
94 हजार करोड़ रुपये के कथित नेटवर्क पर जांच एजेंसियों की नजर
महादेव सट्टा ऐप मामले में करीब 94 हजार करोड़ रुपये के कथित कारोबार और अपराध से अर्जित रकम का आंकड़ा चर्चा में रहा है। यह जांच से जुड़ा अनुमान है, अदालत द्वारा प्रमाणित अपराध की रकम नहीं।
जांच एजेंसियों की पड़ताल केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है। इसमें बैंक खातों, हवाला लेन-देन, विदेश में संपत्तियों, पैनल संचालकों और कथित संरक्षण नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
ED पहले ही सौरभ चंद्राकर से जुड़ी करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच करने की कार्रवाई कर चुकी है। इसमें दुबई में स्थित संपत्तियां भी शामिल बताई गई हैं।
पूछताछ में रवि उप्पल और दूसरे बड़े नामों पर खुल सकता है राज
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल उसके सहयोगियों और कथित संरक्षण नेटवर्क को लेकर है। उसका करीबी सहयोगी रवि उप्पल भी इस मामले में प्रमुख आरोपी है।
CBI की पूछताछ में इन बिंदुओं पर जानकारी जुटाने की कोशिश हो सकती है:
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महादेव ऐप का वास्तविक संचालन और विदेशों में बैठे नेटवर्क के संचालक।
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भारत के अलग-अलग राज्यों में फैले पैनल और ब्रांच संचालक।
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सट्टे की रकम का लेन-देन और हवाला के जरिए विदेश भेजा गया पैसा।
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कथित प्रोटेक्शन मनी नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका।
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रवि उप्पल और अन्य सहयोगियों के साथ आर्थिक लेन-देन।
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विदेशों में बनाई गई संपत्तियों और निवेश का पूरा ब्योरा।
अब रायपुर कोर्ट पर टिकी निगाहें
सौरभ चंद्राकर की रायपुर में पेशी के साथ महादेव सट्टा मामले की जांच एक नए चरण में पहुंच सकती है। CBI की रिमांड अर्जी पर अदालत क्या फैसला देती है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि पुलिस रिमांड मिलती है तो एजेंसी को उससे विस्तार से पूछताछ का अवसर मिलेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सौरभ चंद्राकर की पूछताछ से महादेव सट्टा नेटवर्क के उन चेहरों के नाम सामने आएंगे, जिन पर लंबे समय से जांच एजेंसियों की नजर है? क्या कथित संरक्षण नेटवर्क की परतें भी खुलेंगी? इन सवालों के जवाब अब रायपुर की अदालत में होने वाली कार्यवाही और आगे की जांच से सामने आएंगे।
