CG कलेक्टर बदला तो बदल गया फैसला! DMF के 160 काम रद्द, 8.32 करोड़ की वसूली के आदेश

पेंड्रा, 3 नवम्बर 2026। सरकारी फाइलों में दर्ज एक प्रशासनिक फैसले ने अब बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक कलेक्टर के कार्यकाल में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से करोड़ों रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। लेकिन कलेक्टर बदला तो उन्हीं स्वीकृतियों की जांच शुरू हुई और आखिरकार 160 विकास कार्यों को निरस्त करने का फैसला ले लिया गया। इतना ही नहीं, इन कार्यों के लिए जारी की जा चुकी 8 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की राशि भी वापस सरकारी खाते में जमा कराने के निर्देश दे दिए गए।
मामला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले का है। यहां तत्कालीन कलेक्टर लीना मंडावी के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान DMF मद से 160 विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। इनकी कुल लागत 17 करोड़ 46 लाख 92 हजार 166 रुपये थी। अब वर्तमान कलेक्टर विजय दयाराम के. के कार्यकाल में इन स्वीकृतियों की प्रक्रिया पर सवाल उठे और पूरा मामला निरस्तीकरण तक पहुंच गया। सवाल सिर्फ 160 काम रद्द होने का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की स्वीकृतियां किस प्रक्रिया के तहत जारी हुईं, इसका भी है।
बिना समिति की मंजूरी कैसे जारी हो गईं करोड़ों की स्वीकृतियां?
प्रशासनिक स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, DMF फंड से विकास कार्यों को मंजूरी देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। इसके तहत प्रस्ताव जिला प्रबंधकारिणी समिति के सामने रखा जाना और शासी परिषद से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
लेकिन इन 160 कार्यों के मामले में आरोप है कि निर्धारित समितियों की आवश्यक मंजूरी के बिना ही प्रशासकीय स्वीकृतियां जारी कर दी गईं। इतना ही नहीं, संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को पहली किश्त के रूप में करोड़ों रुपये भी जारी कर दिए गए।यही वह बिंदु था, जहां वर्तमान जिला प्रशासन ने पुराने फैसलों की समीक्षा शुरू की।
वर्तमान कलेक्टर ने शासन तक पहुंचाया मामला
मामले में वर्तमान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने स्वीकृतियों में प्रक्रियागत अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया था।
इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इनमें जनपद पंचायत गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही, नगर पंचायत मरवाही, विद्युत यांत्रिकी संभाग बिलासपुर, क्रेडा, पशु चिकित्सा सेवाएं और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय शामिल थे।
एजेंसियों ने अपने जवाब में कार्यों की आवश्यकता बताते हुए कहा कि DMF कार्यालय से प्रस्ताव मांगे जाने के बाद स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी। हालांकि, निर्धारित समितियों की मंजूरी के बिना स्वीकृतियां जारी करने का संतोषजनक आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
26 अक्टूबर को बैठक, 160 कामों की स्वीकृति निरस्त
शासन स्तर से मिले निर्देशों के बाद 26 अक्टूबर 2026 को जिला प्रबंधकारिणी समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें सभी 160 विकास कार्यों की स्वीकृतियों, संबंधित दस्तावेजों और एजेंसियों के जवाबों की समीक्षा की गई।
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद नियमों के अनुरूप स्वीकृति नहीं होने के आधार पर सभी 160 कार्यों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को जारी राशि वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए।
17.46 करोड़ के काम, 8.32 करोड़ पहले ही जारी
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य जारी की गई राशि का है। विवरण राशि/संख्या निरस्त विकास कार्य 160 कुल स्वीकृत लागत 17,46,92,166 रुपये पहली किश्त जारी 8,32,48,070 रुपये वसूली के निर्देश 8.32 करोड़ रुपये से अधिक अब संबंधित एजेंसियों को जारी पूरी राशि सरकारी खाते में वापस जमा करानी होगी।
अब जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का सवाल
DMF का पैसा खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए खर्च किया जाता है। इसके तहत पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और महिला-बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराए जाते हैं।
ऐसे में 17 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की स्वीकृतियां निरस्त होना महज प्रशासनिक प्रक्रिया का मामला नहीं है। यह सवाल भी उठता है कि यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था, तो स्वीकृति देने और राशि जारी करने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी?
फिलहाल प्रशासन ने 160 कार्यों को निरस्त कर जारी राशि की वापसी के निर्देश दिए हैं। लेकिन इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
