अमित जोगी को उम्रकैद: जग्गी मर्डर केस में बड़ा फैसला, अमित जोगी दोषी करार, उम्रकैद की सजा
बिलासपुर, 6 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा निर्णय दिया है। मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट की ऑर्डर कॉपी सामने आई है, जिसमें अमित जोगी को साजिश रचने का दोषी पाया गया है।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस हत्याकांड में अमित जोगी की भूमिका साजिशकर्ता के रूप में साबित हुई है। इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें अन्य आरोपियों के समान दोषी मानते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। यदि सभी के खिलाफ समान प्रकार के सबूत मौजूद हैं, तो किसी एक को बरी करना न्यायसंगत नहीं होगा, जब तक कि उसके पक्ष में कोई ठोस और अलग कारण न हो।
यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने सुनाया है।

जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को आजीवन कारावास
हाई कोर्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 120-बी (अपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया है. कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है.
हाई कोर्ट का यह फैसला 31 मई 2007 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह पलट दिया है. उस समय स्पेशल जज (एट्रोसिटी) रायपुर ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी सहित अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी. हाई कोर्ट ने साफ कहा कि “एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराया जाना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर दिया जाना कानूनी रूप से असंगत और गलत है.”

इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है और प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
कब हुआ था जग्गी हत्याकांड?
- 4 जून, 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
- इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिसमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे.
- वहीं 28 लोगों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था.
- इसके बाद रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर जोगी के पक्ष में स्टे लगा था. बाद में SC ने केस को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया.
- हाई कोर्ट ने अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.
कौन थे रामावतार जग्गी?
रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे. जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए. विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था.









