Bilaspur News; सर्पदंश मुआवजा घोटाले में अब खुलेगा पैसों का राज! DGP के बयान से मचा हड़कंप, EOW जांच की तैयारी
DGP अरुण देव गौतम बोले- आर्थिक गड़बड़ियों की जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी को प्रस्ताव; बिलासपुर में 431 मौतों पर उठे सवाल, 17 करोड़ से ज्यादा मुआवजा बांटने का दावा

बिलासपुर, 13 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में अब बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। बिलासपुर पहुंचे पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। DGP के इस बयान के बाद मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सौंपे जाने की संभावना बढ़ गई है।
DGP ने अब तक हुई पुलिस कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि पुलिस ने मामले की जांच ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ की है। अब आर्थिक गड़बड़ियों से जुड़े पहलुओं की गहराई से पड़ताल के लिए विशेषज्ञ एजेंसी की मदद लेने का प्रस्ताव भेजा गया है।
4 लाख के मुआवजे वाली योजना में कथित फर्जीवाड़ा
सरकार की ओर से सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। आरोप है कि इसी सरकारी योजना का कथित तौर पर गलत फायदा उठाने के लिए एक संगठित नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेज और रिकॉर्ड तैयार किए।
जांच में यह आरोप सामने आया कि सामान्य परिस्थितियों में हुई मौतों को भी सर्पदंश से हुई मौत के रूप में दर्ज कराकर सरकारी मुआवजे की राशि हासिल की गई। मामले में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और दस्तावेजी फर्जीवाड़े की जांच जारी है।
बिलासपुर में 431 मौतों ने खड़े किए बड़े सवाल
इस मामले में बिलासपुर और जशपुर के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जशपुर में पिछले तीन वर्षों में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज की गईं, जबकि बिलासपुर में 431 मौतें सर्पदंश से होना दर्ज किया गया और करीब 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा बांटे जाने की बात सामने आई है।
इन आंकड़ों में अंतर को लेकर सवाल उठने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में आया।
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। इसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया था।
सामान्य मौतों को सर्पदंश बताने का आरोप
जांच के दौरान आरोप सामने आया कि कथित तौर पर घोटाले में शामिल लोगों ने सामान्य कारणों से हुई मौतों को सर्पदंश से हुई मौत के रूप में दर्ज कराया। इसके लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और रिकॉर्ड तैयार किए गए।
कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों को जानकारी दिए बिना ही मुआवजे की राशि निकालने के आरोप भी सामने आए हैं। अब जांच का अहम बिंदु यह है कि सरकारी मुआवजे की रकम किन खातों में पहुंची और उसका कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल या बंटवारा हुआ।
17 आरोपी गिरफ्तार, डॉक्टर-पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में
मामले की जांच के दौरान अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इनमें डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच में कथित तौर पर ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ नाम से बताए जा रहे नेटवर्क की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में स्वास्थ्य, पुलिस और राजस्व विभाग से जुड़े किन लोगों की भूमिका थी।
हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों की वास्तविक भूमिका और कथित घोटाले में उनकी संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
EOW जांच हुई तो खुल सकता है पैसों का पूरा नेटवर्क
यदि मामले की आर्थिक जांच EOW को सौंपी जाती है, तो जांच का फोकस सिर्फ फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा। बैंक खातों, मुआवजे की रकम के लेन-देन, सरकारी राशि के प्रवाह, लाभार्थियों के रिकॉर्ड और कथित फर्जी दस्तावेजों की विस्तृत वित्तीय पड़ताल हो सकती है।
यानी पुलिस जांच के बाद अब इस मामले में ‘पैसा कहां से आया और कहां गया’ का पूरा हिसाब सामने लाने की कोशिश होगी।
DGP अरुण देव गौतम के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विशेषज्ञ एजेंसी को जांच सौंपने के प्रस्ताव पर कब फैसला होता है। अगर जांच EOW को मिलती है, तो सर्पदंश मुआवजा मामले में कथित आर्थिक नेटवर्क और सरकारी रकम के लेन-देन से जुड़े कई नए राज सामने आने की संभावना है।
