राजनीति

जेल में रामगोपाल अग्रवाल से मिले भूपेश बघेल, 10 मिनट हुई बातचीत; बोले- गलत तरीके से रखा गया है बंद

शराब घोटाले में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी जेल में हैं रामगोपाल अग्रवाल; बचाव पक्ष के मुताबिक छह मामलों में से दो में मिली राहत, चार में जमानत का इंतजार।


रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे और वहां बंद पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई।

जेल से बाहर आने के बाद भूपेश बघेल ने रामगोपाल अग्रवाल की हिरासत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रामगोपाल अग्रवाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें गलत तरीके से जेल में बंद करके रखा गया है। बघेल के इस बयान को शराब घोटाले और उससे जुड़े अन्य मामलों में कांग्रेस की ओर से सरकार और जांच एजेंसियों पर किए जा रहे हमलों के तौर पर देखा जा रहा है।

हाईकोर्ट से जमानत, फिर भी जेल से रिहाई नहीं

रामगोपाल अग्रवाल को 5 नवंबर को बिलासपुर हाईकोर्ट से शराब घोटाले से जुड़े ACB के एक मामले में जमानत मिली थी। हालांकि, इस राहत के बाद भी उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी। वजह यह है कि उनके खिलाफ दूसरे मामलों में भी कानूनी कार्रवाई चल रही है और उनमें जमानत मिलना बाकी है।

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कुल छह मामले दर्ज हैं। इनमें से दो मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जबकि चार मामले अभी लंबित हैं। इन मामलों में भी अदालत से राहत मिलने के बाद ही उनकी रिहाई संभव हो सकेगी।

वकील का दावा- FIR में नाम नहीं, राजनीतिक कार्रवाई के तहत फंसाया

रामगोपाल अग्रवाल के बचाव पक्ष ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वकील फैजल रिजवी का दावा है कि किसी भी FIR में रामगोपाल अग्रवाल का नाम नहीं था। उन्हें पहले से आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति के बयान के आधार पर मामले में शामिल किया गया है।

बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस का कोषाध्यक्ष होने के कारण रामगोपाल अग्रवाल को निशाना बनाया गया। हालांकि, ये बचाव पक्ष के दावे हैं। मामले में जांच एजेंसियों के आरोप और अदालत की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर जारी हैं।

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ED का आरोप- राजीव भवन तक पहुंचाए गए 880 करोड़ रुपये

शराब घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामगोपाल अग्रवाल पर कथित अवैध रकम के लेनदेन में भूमिका होने का आरोप लगाया है। एजेंसी के दावे के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से जुटाई गई करीब 860 से 880 करोड़ रुपये की रकम रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी। ED ने आरोप लगाया है कि इस रकम को कार्यालय तक पहुंचाने में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, शराब सिंडिकेट से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा कारोबारी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के माध्यम से संभाला जाता था। आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर रकम राजीव भवन पहुंचाई जाती थी, जहां पार्टी कार्यालय में काम करने वाले अकाउंटेंट को नकदी सौंपे जाने का दावा किया गया है।

ED ने रामगोपाल अग्रवाल की करीब 9.06 करोड़ रुपये मूल्य की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की कार्रवाई भी की है। एजेंसी ने उनके खिलाफ विशेष PMLA अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। ये सभी जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

शराब घोटाले में जांच और सियासत दोनों जारी

छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच ED और ACB कर रही हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शराब कारोबार में कथित सिंडिकेट के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कमाई और वित्तीय अनियमितताएं की गईं। इस मामले में पूर्व आबकारी अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी, हाईकोर्ट से मिली जमानत और दूसरे मामलों में जारी हिरासत ने इस मामले को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। भूपेश बघेल की जेल में मुलाकात के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर कार्रवाई को गलत बताया है, जबकि ED के आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

 

cgnews24 Team

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