छत्तीसगढ़ कर्मचारियों के लिए अहम खबर; क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान में से चुनना होगा एक विकल्प, एक महीने की मिली मोहलत…नया निर्देश जारी
रायपुर, 10 जून 2026। छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों की वेतन संरचना और पदोन्नति से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (साप्रवि) ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को पत्र जारी कर क्रमोन्नति योजनाओं तथा समयमान वेतनमान से संबंधित नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी है।
जारी निर्देशों के अनुसार राज्य में अब तक प्रचलित क्रमोन्नति योजनाओं को वित्त विभाग द्वारा लागू समयमान वेतनमान व्यवस्था में समाहित करने का निर्णय लिया गया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय 12 मार्च को वित्त सचिव की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में लिया गया था, जिसे अब क्रियान्वयन के लिए लागू किया जा रहा है।
1 अप्रैल 2026 के बाद के मामलों पर नई व्यवस्था लागू
सरकारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 के बाद बनने वाले सभी प्रकरणों पर लागू होगी। इसके तहत कर्मचारियों की पात्रता और लाभ निर्धारण अब संशोधित नियमों के आधार पर किया जाएगा।
वहीं, 31 मार्च 2026 तक नियुक्त हो चुके कर्मचारियों के लिए विशेष विकल्प का प्रावधान रखा गया है, जिससे उन्हें चयन की सुविधा दी जाएगी।
कर्मचारियों को मिलेगा विकल्प चुनने का अवसर
निर्देशों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को अब क्रमोन्नत वेतनमान अथवा समयमान वेतनमान में से किसी एक विकल्प का चयन करना अनिवार्य होगा। यह चयन आदेश जारी होने की तिथि से एक माह के भीतर करना होगा।
सामान्य प्रशासन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक बार चुना गया विकल्प अंतिम और अपरिवर्तनीय माना जाएगा। बाद में किसी भी प्रकार का संशोधन या परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जाएगा।


विभागों को सख्त निर्देश, समय पर कार्रवाई जरूरी
साप्रवि ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र कर्मचारियों को इस संबंध में समय पर पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं और निर्धारित अवधि के भीतर उनसे विकल्प प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी या लापरवाही नहीं होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों को समय पर लाभ और स्पष्ट विकल्प मिल सके।
हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
इस नए निर्णय का सीधा प्रभाव राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर पड़ेगा। अब कर्मचारियों को अपने सेवा हितों, भविष्य की वेतन वृद्धि और लाभ को ध्यान में रखते हुए क्रमोन्नत वेतनमान और समयमान वेतनमान के बीच सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।
सरकारी स्तर पर इस बदलाव को प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

