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कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई: नकल के एवज में रिश्वत मांगने वाली महिला कर्मचारी सस्पेंड, वीडियो सामने आने पर लिया कड़ा एक्शन


कोरबा, 23 जून 2026. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। कटघोरा तहसील कार्यालय में शासकीय काम के बदले रिश्वत (सेवा शुल्क) मांगने वाली एक महिला कर्मचारी को कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। कलेक्टर की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद से राजस्व विभाग में मनमानी और हेरफेर करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने साफ कर दिया है कि शासकीय कार्यों के नाम पर रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और आम जनता से मनमानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वीडियो रिकॉर्डिंग ने खोली पोल: यह है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, आवेदक किशन कुमार ने कटघोरा एसडीएम (SDM) के समक्ष एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तहसील कार्यालय में ‘नकल’ जारी करने के बदले संबंधित महिला कर्मचारी द्वारा अवैध रूप से पैसों (रिश्वत) की मांग की जा रही है।

आवेदक ने केवल शिकायत ही नहीं की, बल्कि अपने आरोपों की पुष्टि के लिए एसडीएम के सामने एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर पेश की। इस वीडियो साक्ष्य के आधार पर एसडीएम ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की।

एसडीएम की जांच में दोषी पाई गई कर्मचारी

एसडीएम ने अपनी प्रारंभिक जांच में मामले को बेहद गंभीर पाया और संबंधित कर्मचारी के कृत्य को शासकीय मर्यादा के विपरीत मानते हुए उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की लिखित अनुशंसा कलेक्टर से की।

सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबन, मुख्यालय बदला

एसडीएम से प्राप्त जांच प्रतिवेदन (रिपोर्ट) का बारीकी से परीक्षण करने के बाद, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने पाया कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) महिला कर्मचारी का यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के सर्वथा विपरीत है।

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इसके बाद कलेक्टर ने त्वरित एक्शन लेते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत कर्मचारी को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

निलंबन की अवधि के दौरान उक्त महिला कर्मचारी का मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ीउपरोड़ा निर्धारित किया गया है। नियमानुसार निलंबन की अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) ही देय होगा।

कलेक्टर का सख्त संदेश: पारदर्शिता से समझौता नहीं

गौरतलब है कि कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पहले ही राजस्व विभाग से जुड़े सभी कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आम जनता के काम पूरी पारदर्शिता के साथ और समय सीमा के भीतर होने चाहिए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सेवा शुल्क के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें आ रही थीं, जिस पर अब प्रशासन ने हंटर चलाना शुरू कर दिया है।

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