700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती अटकी तो भड़के मंत्री! टंक राम वर्मा ने अफसरों को दिया अल्टीमेटम, 15 सितंबर तक पदोन्नति पूरी करने के निर्देश
उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री का सख्त रुख; 595 प्राध्यापक पदों की सीधी भर्ती में तेजी, 1 अक्टूबर तक लंबित न्यायालयीन मामलों के निराकरण का अल्टीमेटम

रायपुर, 2 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और विभागीय कामकाज में तेजी लाने को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने बुधवार को मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए फैसलों पर अब तक हुई कार्रवाई की बिंदुवार समीक्षा की गई।
समयबद्ध कार्यों में देरी पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को प्रशासनिक ढिलाई तत्काल दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। बैठक में विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, आयुक्त रीता यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती में तेजी के निर्देश
समीक्षा बैठक में शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही 595 रिक्त प्राध्यापक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया।
15 सितंबर तक पूरी करनी होगी प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया
स्नातक प्राचार्य के पदों पर लंबित पदोन्नति मामलों को लेकर मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 15 सितंबर 2026 तक पदोन्नति से संबंधित समस्त कार्यवाही पूरी की जाए।
बैठक में ऐसे प्राध्यापकों की पदोन्नति के मामलों की भी समीक्षा की गई, जो पात्रता पूरी नहीं करने के बावजूद पदोन्नति प्राप्त कर चुके हैं। मंत्री ने ऐसे मामलों की जांच और की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी।
1 अक्टूबर तक न्यायालयीन मामलों के निराकरण का निर्देश
वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी पर मंत्री ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर मामलों के लंबित रहने के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का रुख करना पड़ रहा है।
मंत्री ने अधिकारियों से लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का पूरा विवरण मांगा और 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा शिक्षकों के पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय से भेजी गई शिकायतों पर हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई।
बजट की अधूरी जानकारी पर जताई नाराजगी
बैठक में वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए। पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी जानकारी अधूरी मिलने पर उन्होंने असंतोष जताया।
उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूरी सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अतिथि व्याख्याताओं के कामकाज का होगा निरीक्षण
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शासकीय महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया।
मंत्री ने शैक्षणिक गुणवत्ता और शिक्षण व्यवस्था की नियमित निगरानी पर जोर दिया।
सीट बढ़ाने के लिए नया कैलेंडर लागू करने की तैयारी
छात्र-छात्राओं के हित को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया गया।
इसके तहत शासकीय और निजी महाविद्यालयों से दिसंबर तक सीट वृद्धि के प्रस्ताव मंगाए जाएंगे और जनवरी तक स्वीकृति जारी करने की योजना है। इसका उद्देश्य समय पर निर्णय लेकर आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को राहत देना है।
लॉ और B.Ed. आवेदनों के समयबद्ध निराकरण के निर्देश
मंत्री ने लॉ और बी.एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए।
वहीं 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम को लेकर एनसीटीई, दिल्ली की नैक ग्रेडिंग संबंधी शर्तों पर चर्चा के लिए विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से आवश्यक तैयारियां शुरू करने को कहा गया है।
भर्ती, पदोन्नति और लंबित मामलों पर सरकार का फोकस
समीक्षा बैठक में मंत्री टंक राम वर्मा का सबसे ज्यादा जोर भर्ती, पदोन्नति, न्यायालयीन मामलों और वित्तीय पारदर्शिता पर रहा। 700 सहायक प्राध्यापक भर्ती और 595 प्राध्यापक पदों की सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी के साथ ही 15 सितंबर और 1 अक्टूबर की समयसीमा तय किए जाने से अब विभागीय अधिकारियों के सामने लंबित प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने की चुनौती है।
