Bilaspur- एमआईसी बैठक में जमकर बवाल: “पार्षद निष्क्रिय” बयान पर मेयर घिरीं, जमकर हंगामा….अफसरों पर भी लगे गंभीर आरोप

बिलासपुर। नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) की बैठक सोमवार को भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच संपन्न हुई। बैठक के दौरान पार्षदों और एमआईसी सदस्यों ने मेयर, अधिकारियों और निगम व्यवस्था पर जमकर सवाल उठाए। कई बार माहौल इतना गरमा गया कि सभापति और वरिष्ठ पार्षदों को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी।
बैठक की शुरुआत ही चेंबर आवंटन के मुद्दे पर विवाद से हुई। एमआईसी सदस्य तिलक साहू ने आरोप लगाया कि कुछ सदस्यों को बेहतर चेंबर दिए गए हैं, जबकि उन्हें ऐसा चेंबर आवंटित किया गया है जो बैठने योग्य नहीं है और उसके पास प्रसाधन कक्ष होने के कारण बदबू आती है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि आखिर उन्हें प्रभारी किस काम के लिए बनाया गया है।

इस दौरान मेयर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “80 प्रतिशत पार्षद और एमआईसी सदस्य निष्क्रिय हैं, वे न निगम के कार्यक्रमों में आते हैं, न पार्टी के कार्यक्रमों में और न ही अपने विभागों के कामकाज पर ध्यान देते हैं।” मेयर की इस टिप्पणी पर कई पार्षद भड़क गए और उन्होंने तीखी आपत्ति दर्ज कराते हुए सवाल उठाया कि उन्हें निष्क्रिय कहने का अधिकार किस आधार पर दिया जा रहा है।
शनिचरी बाजार की दुकानों पर फिर गरमाई बहस
बैठक में शनिचरी बाजार की दुकानों के किराए का मामला भी उठा। एमआईसी सदस्य बंधु मौर्य ने किराया नहीं देने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए दुकानों को सील करने और बुलडोजर चलाने तक की बात कही। इस पर मेयर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा उचित नहीं है। जवाब में बंधु मौर्य ने भी तीखा प्रतिवाद करते हुए कहा कि पार्षदों ने ही मेयर को चुना है और बार-बार उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बढ़ते विवाद के बीच सभापति और वरिष्ठ पार्षदों को हस्तक्षेप करना पड़ा।

आयुक्त के पीए पर गंभीर आरोप
एमआईसी सदस्य प्रकाश यादव ने निगम आयुक्त के निजी सहायक (पीए) सत्यनारायण देवांगन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे केवल प्रभावशाली नेताओं और ठेकेदारों की फाइलों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि आम पार्षदों के आवेदन और पत्रों को दबा दिया जाता है। उन्होंने आयुक्त से इस मामले में जवाब और कार्रवाई की मांग की।
इंदु चौक विवाह भवन पर फिर उठे सवाल
जरहाभाठा स्थित इंदु चौक के विवाह भवन का मामला भी बैठक में गूंजा। एमआईसी सदस्य संजय यादव ने भवन शाखा अधिकारी अनुपम तिवारी से पूछा कि सीलिंग की कार्रवाई के बाद आगे क्या कदम उठाए गए। अधिकारी द्वारा नजूल विभाग से अनुमति मिलने की जानकारी देने पर संजय यादव ने सवाल किया कि कार्रवाई में देरी क्यों हुई और अब तक क्या किया गया।

सभापति का बड़ा आरोप, बोले- सीलिंग और खोलने का खेल चल रहा
बैठक के दौरान सभापति विनोद सोनी ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहर में सील लगाने और बाद में खोलने का “धंधा” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कार्रवाई की जाती है और फिर कथित रूप से लेन-देन के बाद सील खोल दी जाती है। सभापति ने निगम आयुक्त से इस पूरे मामले की जांच कराने और कथित भयादोहन पर रोक लगाने की मांग की।
अवैध ओयो होटल और रिहायशी क्षेत्र का मुद्दा
एमआईसी सदस्यों ने शहर में बिना अनुमति संचालित हो रहे कथित अवैध ओयो होटल और गेस्ट हाउसों का मुद्दा भी उठाया। सदस्यों ने आरोप लगाया कि रिहायशी क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर इस तरह की गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं और क्षेत्र का माहौल प्रभावित हो रहा है। मामले में कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल खड़े किए गए।
1 रुपये प्रति वर्गफुट जमीन पर बने फार्म हाउस का मामला भी गूंजा
बैठक में गोकुल नगर क्षेत्र में डेयरी संचालन के लिए रियायती दर पर आवंटित जमीनों के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठा। एमआईसी सदस्य संजय यादव ने आरोप लगाया कि डेयरी के नाम पर एक रुपये प्रति वर्गफुट की दर से ली गई जमीनों पर फार्म हाउस, दुकानें और अन्य निर्माण कर दिए गए हैं। उन्होंने संपदा अधिकारी अंकुर पाण्डेय से सर्वे कराने और ऐसे मामलों की जांच कर दोषियों की लीज निरस्त करने की मांग की।
एमआईसी की यह बैठक विकास कार्यों की समीक्षा से अधिक आरोप-प्रत्यारोप, तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के कारण चर्चा में रही। कई मुद्दों पर पार्षदों और अधिकारियों के बीच टकराव खुलकर सामने आया, जिससे निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
संभावित हेडिंग्स:
- एमआईसी बैठक में बवाल: ‘80% पार्षद निष्क्रिय’ बयान पर मेयर घिरीं, जमकर हंगामा
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- चेंबर विवाद से शुरू हुआ हंगामा, अवैध ओयो और जमीन घोटाले तक गूंजी एमआईसी बैठक
- एमआईसी में आरोपों की बारिश: अफसरों पर वसूली, पीए पर फाइल दबाने के आरोप









