बिलाईगढ़ अध्यक्ष दामोदर दुबे को हाई कोर्ट से झटका, पद से हटाने का आदेश बरकरार…57 प्लॉट का मामला पड़ा भारी

बिलासपुर, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलाईगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष दामोदर प्रसाद दुबे को बड़ा झटका दिया है। राज्य शासन के उस आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका अदालत ने खारिज कर दी है, जिसके तहत उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के साथ आगामी कार्यकाल के लिए भी अयोग्य घोषित किया गया था। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने 4 जुलाई 2026 के शासनादेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि आरोपों से जुड़ी घटनाएं अध्यक्ष चुने जाने से पहले की होने मात्र से धारा 41-ए के तहत की गई कार्रवाई अवैध नहीं हो जाती।
मामले के अनुसार, जांच में करीब 2.45 हेक्टेयर कृषि भूमि को कथित तौर पर वैध कॉलोनाइजर लाइसेंस और भूमि उपयोग परिवर्तन के बिना 57 आवासीय भूखंडों में बांटने का मामला सामने आया था। शासन ने अदालत में दलील दी कि नगर पंचायत के हितों और जनहित की रक्षा के लिए कार्रवाई जरूरी थी।
शासन के मुताबिक, अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद दामोदर प्रसाद दुबे ने इस मामले में कार्रवाई से संबंधित नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) के प्रस्ताव पर अध्यक्ष के रूप में हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
चुनाव से पहले की घटनाओं को बनाया कार्रवाई का आधार
दामोदर प्रसाद दुबे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शासन के फैसले को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि संबंधित जमीनों की खरीद-बिक्री वर्ष 2013 से 2024 के बीच हुई, जबकि वे फरवरी 2025 में नगर पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। ऐसे में अध्यक्ष बनने से पहले की घटनाओं के आधार पर उन्हें पद से हटाना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी दलील दी कि चुनाव से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम की धारा 20 के तहत चुनाव याचिका का प्रावधान है। इसके अलावा, उन्होंने जांच रिपोर्ट और शिकायत की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन की बात कही।
धारा 20 और 41-ए में अंतर पर अदालत का जोर
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष चुनाव को अमान्य घोषित करने और निर्वाचित पदाधिकारी को पद से हटाने की कार्रवाई के बीच अंतर का सवाल उठा। शासन की ओर से तर्क दिया गया कि धारा 41-ए के तहत कार्रवाई का उद्देश्य नगर पंचायत के हितों और व्यापक जनहित की रक्षा करना है।
अदालत ने यह भी गौर किया कि दामोदर प्रसाद दुबे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जवाब देने का अवसर दिया गया था और व्यक्तिगत सुनवाई भी हुई थी। इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने शासन के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।
₹3.27 करोड़ के जुर्माने पर अपील का रास्ता खुला
हालांकि, जुर्माने के मामले में दामोदर प्रसाद दुबे के लिए वैधानिक अपील का विकल्प खुला रखा गया है। हाई कोर्ट ने उन्हें सीएमओ द्वारा 24 अप्रैल 2026 को लगाए गए 3 करोड़ 27 लाख 4 हजार 740 रुपये के जुर्माने को चुनौती देने के लिए कलेक्टर के समक्ष अपील दायर करने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील पर संबंधित प्राधिकारी कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा।
