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Bhupesh Baghel News: पूर्व सीएम भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जानें किस मामले में हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा

पाटन विधानसभा चुनाव विवाद में भूपेश बघेल की नई याचिका खारिज। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सुनवाई में जस्टिस वी. मोहना ने कहा- आप जितना संभव हो सके, उतनी देरी कर रहे हैं। अब चुनाव याचिका की सुनवाई आगे बढ़ेगी।


नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली भाजपा नेता विजय बघेल की चुनाव याचिका के मामले में शीर्ष अदालत ने मंगलवार को उनकी नई याचिका खारिज कर दी। भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान परिसीमा यानी लिमिटेशन के सवाल को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करने से इनकार कर दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सुनवाई के दौरान पीठ ने चुनाव याचिका की कार्यवाही में बार-बार देरी किए जाने पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि चुनाव संबंधी मामलों का निपटारा उचित समयसीमा में होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? जजों ने देरी पर जताई नाराजगी

मंगलवार को सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह मानकर गलती की है कि चुनाव याचिका की समयसीमा से जुड़ा कोई प्रारंभिक मुद्दा विचारणीय नहीं है।

कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालत को या तो चुनाव याचिका की परिसीमा के सवाल को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करना चाहिए या फिर यह नहीं कहना चाहिए कि ऐसा कोई मुद्दा ही नहीं है। उनका तर्क था कि यदि चुनाव याचिका निर्धारित समयसीमा के बाद दाखिल हुई है तो इस सवाल पर पहले निर्णय होना चाहिए, ताकि पूरे मुकदमे की सुनवाई की जरूरत ही न पड़े।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति वी. मोहना ने कहा कि लिमिटेशन का सवाल तथ्यों और कानून से जुड़ा मिला-जुला मुद्दा है। उन्होंने सवाल किया कि यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने भूपेश बघेल के वकीलों से कहा कि यह दलील पहले भी दी जा सकती थी और उचित आधार के बिना कोई मुद्दा तय नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वी. मोहना ने कहा, “मुकदमे को आगे बढ़ने दीजिए। आप जितना संभव हो सके, उतनी देरी कर रहे हैं। फैसला आएगा।”

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CJI सूर्यकांत ने पूछा- लिखित बयान में संशोधन की मांग क्यों नहीं की?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी भूपेश बघेल की ओर से उठाई गई आपत्ति पर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री को चुनाव याचिका की समयसीमा पर आपत्ति थी तो उन्होंने अपने लिखित बयान में उस आधार को शामिल करने के लिए संशोधन की मांग क्यों नहीं की?

इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि भूपेश बघेल लिखित बयान में संशोधन के लिए कोई आवेदन दाखिल नहीं करेंगे। उन्होंने अदालत से इस बयान को रिकॉर्ड पर लेने का आग्रह किया।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि चुनाव विवादों का निपटारा समयबद्ध तरीके से होना जरूरी है। यदि इस स्तर पर नई मांग स्वीकार की जाती है तो आगे और आवेदन दाखिल हो सकते हैं, जिससे मुकदमे की सुनवाई में और देरी होगी।

पीठ ने अंततः याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के आग्रह को देखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने से परहेज किया।

28 सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया था हस्तक्षेप

यह पहली बार नहीं है जब भूपेश बघेल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले 28 सितंबर 2026 को भी उन्होंने विजय बघेल की चुनाव याचिका को लेकर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।

उस समय सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट से यह विचार करने को कहा था कि क्या परिसीमा के सवाल की प्रारंभिक मुद्दे के रूप में जांच करना उचित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय इस मुद्दे पर कोई अंतिम राय नहीं दी थी।

इसके बाद भूपेश बघेल ने हाई कोर्ट में फिर आवेदन देकर परिसीमा के सवाल को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करने की मांग की। हाई कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2026 को यह आवेदन खारिज कर दिया। इसी आदेश को उन्होंने अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने इस नई याचिका को भी खारिज कर दिया।

क्या है पूरा मामला? विजय बघेल ने क्यों दी थी भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती?

यह विवाद वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। पाटन विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार भूपेश बघेल ने भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल को पराजित किया था।

चुनाव परिणाम के अनुसार:

उम्मीदवार पार्टी प्राप्त वोट
भूपेश बघेल कांग्रेस 95,438
विजय बघेल भाजपा 75,715

हार के बाद भाजपा उम्मीदवार विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी थी। उनका आरोप है कि मतदान से पहले लागू 48 घंटे की मौन अवधि के दौरान भूपेश बघेल ने पाटन विधानसभा क्षेत्र में जुलूस या रोड शो निकाला था। विजय बघेल ने इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए निर्वाचन रद्द करने की मांग की है। यह आरोप है, जिस पर चुनाव याचिका में सुनवाई जारी है।

45 दिन की समयसीमा को लेकर क्या है विवाद?

भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका की वैधता पर उठाई गई प्रमुख आपत्ति जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिनों की समयसीमा से जुड़ी है।

कानून के मुताबिक, किसी उम्मीदवार के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के भीतर दाखिल की जानी चाहिए।

इस मामले में पाटन विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम 3 दिसंबर 2023 को घोषित हुआ था। ऐसे में 45 दिनों की निर्धारित अवधि 17 जनवरी 2024 को समाप्त हो गई थी।

भूपेश बघेल की ओर से कपिल सिब्बल ने पहले की सुनवाई में विजय बघेल के हलफनामे की तारीख का हवाला देते हुए सवाल उठाया था। उनका कहना था कि हलफनामे पर 22 जनवरी 2024 की तारीख दर्ज है, जबकि चुनाव याचिका दाखिल करने की 45 दिनों की अवधि 17 जनवरी को ही समाप्त हो चुकी थी।

इसी आधार पर बचाव पक्ष का तर्क था कि चुनाव याचिका निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ दाखिल नहीं हुई और इसे शुरुआती स्तर पर ही खारिज किया जाना चाहिए था।

हाई कोर्ट में भी कई बार उठ चुका है मामला

इस चुनाव विवाद में समयसीमा और याचिका की वैधता को लेकर हाई कोर्ट में पहले भी कई आवेदन दिए गए हैं। भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका की सुनवाई रोकने और उसकी स्वीकार्यता पर पहले निर्णय लेने की मांग की गई थी।

हाई कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को परिसीमा के आधार पर चुनाव याचिका खारिज करने की मांग वाला आवेदन अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए हाई कोर्ट को परिसीमा के सवाल को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में देखने की संभावना पर विचार करने की छूट दी थी।

इसके बाद हाई कोर्ट में एक और आवेदन दाखिल किया गया। 13 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने कहा कि मुकदमा साक्ष्य के चरण में पहुंच चुका है और इस स्थिति में परिसीमा के सवाल को अलग करके पहले तय करने की अनुमति देना उचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश से परिसीमा संबंधी आपत्ति के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के 3 नवंबर के आदेश के बाद भूपेश बघेल की ओर से परिसीमा के मुद्दे को अलग से प्रारंभिक स्तर पर तय कराने की नई मांग खारिज हो गई है। हाई कोर्ट में विजय बघेल की चुनाव याचिका पर सुनवाई आगे बढ़ेगी और साक्ष्यों के आधार पर मामले का निपटारा किया जाएगा।

 

cgnews24 Team

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