हाईकोर्ट की सख्ती: IPS रतनलाल डांगी मामले में पुलिस को एक सप्ताह की मोहलत, जवाब नहीं दिया तो अफसर की होगी पेशी

बिलासपुर। IPS अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ चल रहे उत्पीड़न के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट के निर्देश के बावजूद जांच से जुड़ा जवाब तय समय पर पेश नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।
कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई तक जवाब पेश नहीं हुआ तो ऑफिसर-इन-चार्ज को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है।
जांच पर भी उठे सवाल
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में मामले की जांच IAS अधिकारी से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जांच IPS अधिकारियों के माध्यम से कराई जा रही है और जांच अधिकारी के रैंक को लेकर भी आपत्ति है।
याचिका में IPS आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे द्वारा जांच किए जाने का उल्लेख किया गया है। साथ ही मिलना कुर्रे के रैंक को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
डांगी के निलंबन और संपत्ति जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने IPS रतनलाल डांगी के निलंबन का मुद्दा भी उठाया है। इसके अलावा डांगी की कथित अवैध संपत्ति की जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर अंतिम फैसला संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।
29 सितंबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के जरिए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।
कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस विभाग के सामने तय समयसीमा में जवाब दाखिल करने की चुनौती है। जवाब में देरी हुई तो संबंधित अधिकारी को कोर्ट में पेश होने का सामना करना पड़ सकता है।
