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प्रत्याशी नहीं छुपा सकेंगे कोई आपराधिक जानकारी, अब विज्ञापन देकर बताना होगा…..वह चोर उचक्का, धोखेबाज, अपराधी, घोटालेबाज और बेईमान है

सुप्रीम कोर्ट की निर्देश के बाद भारत निर्वाचन आयोग के एक आदेश ने आपराधिक किस्म के प्रत्याशियों के लिए मुसीबत बढ़ा दिया है | आदेश के अनुसार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जानकारी  प्रदेश के बड़े अखबारों और न्यूज़ चैनल में जारी करना होगा, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का निर्देशों का पालन करते हुए इस संबंध में गाइडलाइन जारी कर दी है, अब चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को अपनी कुंडली जनता को दिखाना होगा |
कलेक्टर पी दयानंद ने बताया कि विधानसभा चुनाव लड़ने वाले अब हर प्रत्याशी को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख से लेकर मतदान की तारीख के बीच अलग-अलग दिनों में तीन बार प्रदेश के प्रमुख अखबारों और समाचार चैनलों में विज्ञापन जारी कर अपने खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी सार्वजनिक करना होगी, इसके साथ ही प्रत्याशी नामांकन फॉर्म में अपनी चल-अचल सम्पत्ति और शैक्षणिक योग्यता के बारे में भी जानकारी देना होगा, इसके साथ चुनाव परिणाम जारी होने के बाद विजयी प्रत्याशियों को 30 दिन के अंदर चुनाव आयोग के समक्ष जानकारी उपलब्ध करना होगा की उन्होंने किन किन अखबारों और न्यूज चैनलों में अपने आपराधिक मामलों की जानकारी सार्वजनिक की थी ।

अगर किसी राजनीतिक दल ने किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया हो, फिर चाहे वह पार्टी मान्यता प्राप्त हो या गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत पार्टी, तो ऐसे उम्मीदवारों को संबंधित रिटर्निंग अफसर (आरओ) के समक्ष यह बताना होगा कि उन्होंने इसकी जानकारी अपने राजनीतिक दल को दे दी है। इसतरह की घोषणा के लिए फार्म-26 में 6-ए का नया कॉलम दिया गया है। उम्मीदवारों को जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ) को अखबार में छपे विज्ञापन की प्रति लगाकर देनी होगी।
 सुप्रीम कोर्ट में गया था मामला
राजनीति का आपराधिकरण रोकने और पारदर्शिता लाने सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली हाई कोर्ट से मांग की थी, इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने  तत्काल आदेश जारी कर हर प्रत्याशी के लिए अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को सार्वजनिक करने के निर्देश दिया है, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की इस निर्देश की पालन करते हुए गाइड लाइन जारी की है, जिससे अब विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को अपने आपराधिक मामले की जानकारी मिडिया के माध्यम से सार्वजनिक करनी होगी,इसके साथ ही यदि प्रचार में कोई वीडियो या ऑडियो इस्तेमाल किया जा रहा है तो उसका भी 33 फीसदी हिस्सा इसी तरह की जानकारी पर खर्च करना होगा। यदि कोई प्रत्याशी ऐसा नहीं करता है तो उसका नामांकन रद्द करने की मांग भी हाई कोर्ट से की गई है।

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