बजट से पहले सहायक शिक्षकों की दो टूक चेतावनी: वेतन विसंगति और क्रमोन्नति पर निर्णय नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन

रायपुर, 23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ में बजट सत्र से ठीक पहले सहायक शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार को एक बार फिर याद दिलाई है। वेतन विसंगति और क्रमोन्नति वेतनमान के मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए सहायक शिक्षकों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष Ravindra Rathore ने बयान जारी कर कहा कि लंबे समय से सहायक शिक्षक वेतन असमानता की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए वादों के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
वेतन विसंगति बना सबसे बड़ा मुद्दा
फेडरेशन का कहना है कि समान कार्य के बावजूद सहायक शिक्षकों को अपेक्षित वेतनमान नहीं मिल पा रहा है। इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन का दावा है कि कई बार ज्ञापन सौंपने और वार्ता करने के बाद भी समाधान नहीं निकला।
राठौर ने कहा कि सहायक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार गंभीर नजर नहीं आ रही है। उन्होंने बजट सत्र में वेतन विसंगति दूर करने और क्रमोन्नति वेतनमान लागू करने की मांग दोहराई।
क्रमोन्नति वेतनमान पर भी निर्णय लंबित
फेडरेशन के अनुसार, सहायक शिक्षकों को समय पर क्रमोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि मनोबल पर भी असर पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार बजट में इस संबंध में स्पष्ट घोषणा नहीं करती है, तो चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
सरकार को दी चेतावनी
Sahayak Shikshak Samagra Shikshak Federation ने कहा है कि उनकी मांगें जायज और व्यावहारिक हैं। यदि बजट में समाधान नहीं हुआ, तो प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन और रैली आयोजित की जाएगी।
राठौर ने कहा, “सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हमें लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना पड़ेगा।”
बजट सत्र पर टिकी निगाहें
अब सहायक शिक्षकों की निगाहें आगामी बजट सत्र पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार वेतन विसंगति और क्रमोन्नति वेतनमान को लेकर क्या घोषणा करती है।
प्रदेश के हजारों सहायक शिक्षकों को उम्मीद है कि इस बार उनके हित में ठोस निर्णय लिया जाएगा, जिससे लंबे समय से चली आ रही असमानता खत्म हो सके।








