TEDx Jaipur के मंच पर छलका संघर्ष का सफर: “दो महीने मेहनत नहीं, जान लगा दी थी… पर जान निकला नहीं” : आचार्य संदीप द्विवेदी

बिलासपुर/जयपुर। सपनों को सच करने की कीमत क्या होती है? संघर्ष आखिर कितना कठिन हो सकता है? और एक छोटे से गांव का युवा अपने जुनून के दम पर राष्ट्रीय मंच तक कैसे पहुंच सकता है? इन सवालों के जवाब तब मिले, जब राजस्थान के जयपुर में आयोजित प्रतिष्ठित TEDx Jaipur National University के मंच पर छत्तीसगढ़ के युवा शिक्षाविद् और आचार्य इंस्टीट्यूट के संस्थापक Sandeep Dwivedi ने अपने जीवन के संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की। मंच पर शिक्षक नहीं, बल्कि एक प्रेरक वक्ता के रूप में खड़े संदीप द्विवेदी की बातें जैसे-जैसे आगे बढ़ती गईं, सभागार में मौजूद हर शख्स अपनी कुर्सी पर मानो चुम्बक की तरह स्थिर हो गया। उनके शब्दों में संघर्ष की सच्चाई थी, भावनाओं की गहराई थी और सफलता तक पहुंचने की तपस्या की झलक थी। सबसे ज्यादा तालियां तब गूंजीं, जब उन्होंने मुस्कुराते हुए लेकिन भावुक अंदाज में कहा “शुरुआत में संघर्ष के दो महीने मैंने मेहनत नहीं की, बल्कि जान लगा दी थी… पर जान निकला नहीं।” यह एक वाक्य नहीं, बल्कि उस संघर्ष का सार था जिसने एक साधारण शिक्षक को हजारों विद्यार्थियों की प्रेरणा बना दिया।
TEDx Jaipur क्या है? विस्तार से जानिए
TEDx Jaipur एक स्वतंत्र रूप से आयोजित TEDx कार्यक्रम है, जो वैश्विक TED (Technology, Entertainment, Design) आंदोलन से प्रेरित होकर आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को एक मंच प्रदान करना है, जिनके पास समाज, शिक्षा, विज्ञान, व्यवसाय, कला, नेतृत्व या जीवन से जुड़े प्रेरणादायक विचार और अनुभव हों जिन्हें व्यापक स्तर पर साझा किया जा सके। इस शानदार कांफ्रेस को देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें!
URL : https://youtu.be/GB7Cik22KrY?si=zkR4kluVF0R9oeJq
Escaping the Script You Were Given | Sandeep Dwivedi | TEDxJaipur National University
जब स्टाफ की सैलरी देने के लिए भी नहीं थे पैसे
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए संदीप ने बताया कि कोचिंग शुरू करने का फैसला तो कर लिया था, लेकिन हालात इतने कठिन थे कि स्टाफ को वेतन देने तक के लिए पैसे नहीं थे। उस दौर में विद्यार्थियों के पालकों ने उन पर भरोसा जताया और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि संस्थान को खड़ा करने के लिए केवल पढ़ाना ही नहीं, बल्कि खुद सफाई करना, व्यवस्था संभालना और हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी निभानी पड़ी। “कोचिंग को स्थापित करने के लिए मैंने सिर्फ पढ़ाया ही नहीं, बल्कि उसकी सफाई तक की। उसी संघर्ष ने आज यहां तक पहुंचाया है।”
दोस्त अनुराग ने बढ़ाया मदद का हाथ
अपने संघर्ष के दिनों का एक भावुक प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने अपने मित्र अनुराग का जिक्र किया। उन्होंने कहा— “जब हालात मुश्किल थे तो मैंने अपने दोस्त अनुराग से कहा कि कुछ मदद कर दो। वह उस समय पीएचडी कर रहा था। उसने बिना कुछ सोचे अपनी दो-तीन महीने की स्कॉलरशिप मुझे दे दी और कहा— यही है मेरे पास। इस घटना को याद करते हुए संदीप कुछ क्षणों के लिए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता कभी अकेले नहीं मिलती, उसके पीछे कई लोगों का विश्वास और सहयोग छिपा होता है।
हर सिग्नल हमेशा ग्रीन नहीं होता
युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने सफलता का अपना सूत्र भी साझा किया। उन्होंने कहा— याद रखिए, आपके लिए सभी सिग्नल कभी ग्रीन नहीं होंगे और वास्तविक जीवन में ऐसा होना संभव भी नहीं है। लेकिन जब एक सिग्नल रेड से ग्रीन होने की तैयारी में हो, उस समय अपनी पुरानी गलतियों को सुधारिए। ताकि जब अगला अवसर मिले, तो वह सफलता से भरा हो। उनके इस संदेश को सभागार में बैठे युवाओं ने खूब सराहा।
टीम को दी आजादी, इसलिए आज भी साथ हैं पुराने शिक्षक
आचार्य इंस्टीट्यूट की सफलता का राज बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने शिक्षकों पर भरोसा किया। मैंने अपने स्टाफ को पूरी आजादी दी। उन्हें खुद सीखने का अवसर दिया और फिर विद्यार्थियों को पढ़ाने के तरीके समझाए। शायद यही कारण है कि आज हमारा पांच साल का सफर पूरा हो चुका है, हमारे पांच सेंटर हैं और पांच साल पुराने शिक्षक आज भी हमारे साथ हैं।
गांव से TEDx तक का सफर
अपने जीवन की यात्रा को याद करते हुए संदीप ने कहा कि आज भी वे अपनी पुरानी तस्वीरें देखते हैं और सोचते हैं कि कभी जोखिम लेने से पहले कितना डर लगता था। आज 2026 की तस्वीर आपके सामने है। मैं इस मंच पर खड़ा हूं, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक छोटे से गांव से निकलकर यहां तक पहुंच पाऊंगा। उनकी यह बात सुनकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
पत्नी को दिया सफलता का श्रेय
अपने संबोधन के अंत में संदीप द्विवेदी ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपनी पत्नी को दिया। भावुक होकर उन्होंने कहा मैं दिल से अपनी पत्नी को धन्यवाद देता हूं। उनके मोटिवेशन के बिना यह सब संभव नहीं था। मेरी पत्नी मेरी ताकत है, मेरा अभिमान है।
शिक्षा सर्वाइवल का माध्यम बने, सिर्फ व्यवसाय नहीं
अपने उद्बोधन के अंतिम क्षणों में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा मैं चाहता हूं कि शिक्षा हमेशा शिक्षा ही बनी रहे। वह सर्वाइवल का माध्यम हो सकती है, लेकिन केवल व्यवसाय बनकर न रह जाए। TEDx Jaipur के मंच से निकले ये शब्द केवल एक सफल शिक्षक की कहानी नहीं थे, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा थे जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। संघर्ष, विश्वास, रिश्तों और शिक्षा के प्रति समर्पण से भरी संदीप द्विवेदी की यह कहानी लंबे समय तक लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी।
