मनरेगा बचाओ संग्राम: बिलासपुर में एक दिवसीय उपवास, मजदूरों के हक के लिए कांग्रेस का विरोध

बिलासपुर, 11 जनवरी 2026। बिलासपुर में आज “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत एक दिवसीय उपवास/अनशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह विरोध कार्यक्रम देश-प्रदेश में मनरेगा का नाम बदलने की कथित साजिश और मनरेगा मजदूरों के अधिकारों की रक्षा को लेकर किया गया।


गांधी चौक, बिलासपुर में आयोजित इस एक दिवसीय उपवास में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में ऊर्जावान कार्यकर्ता शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा है और इसके साथ किसी भी तरह का छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को कमजोर करने और मजदूरों के अधिकार छीनने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के नाम और अधिकारों से छेड़छाड़ बंद नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से उपवास कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया और मनरेगा मजदूरों के हित में एकजुट रहने का संकल्प लिया गया।

जिला अध्यक्ष सुधांशु मिश्र ने कहा कि मनरेगा योजना गरीब और मजदूर वर्ग के लिए सबसे मजबूत सहारा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार इस योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगी और मनरेगा मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।


ग्रामीण जिला अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है। उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम बदलने और इसके स्वरूप से छेड़छाड़ की कोशिशें मजदूर विरोधी हैं। कांग्रेस पार्टी मजदूरों के हक में हर स्तर पर लड़ाई

...आंदोलन को और तेज किया जाएगा

पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने भी कहा कि मनरेगा देश के गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग के लिए सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। पांडेय ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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